घुटरू का है रयौ है? आज तौ फ्री दीखै है तू! कछू काम वाम नाँय नें का जो बैठें बैठें जम्हाई
लै रयौ है!
हमें चाहिए आजादी भाग 2 – ब्रजभाषा व्यंग्य
आउ भेंन बत्तो, बैठ! और बताय, कल तौ बड़ी जल्दी में हुती, रुकी ही नाँय, आधी खबर सुनाय कें ही चली गयी! अब
बताय जंगल के समाचार’न के बारे में
हमें चाहिए आजादी भाग 1 – ब्रजभाषा व्यंग्य
घुटरू जंगल के समाचार सुने
तैंनें ?
नाँय बत्तो, अभी तौ नाँय सुने! अब तू आयी है तौ धीरें-धीरें बिना पूछें सबरे गाम के समाचार सुनवे कों मिलंगे! तू आय जावै तौ दुनिया-जहान की खबर तौ मिल जावै मोय, नहीं तौ कौन है जो बिना पैसा कौ अखबार पढ़ावै, वौ हू विवेचना’न के संग!
ईंधन बचाओ रील बनाओ – ब्रजभाषा व्यंग्य
घुटरू आज के अखबार देखे? कैसे
पूरे पूरे पेज के बिज्ञापन छापे गये हैं? कहाँ सों आतौ होयगौ इतनों
पैसा? मोय तौ लगै है कि दुनिया में जो तेल और गैस की कीमत बढ़ रही हैं नें वा कौ असली
कारण यै फुटबॉल कौ महाकुम्भ ही न होय!
जागो साक्षर प्यारे – ब्रजभाषा व्यंग्य
कहाँ
चलौ घुटरू, बैठ, या बीजरा में
कहाँ जाय रह्यौ है? नैंक चित्त कों चैन परन दै! तू कहै तौ तेरे लिएं नींबू निचोर
कें सिकंजी बनाय देंउ और तू कहै तौ आमी कौ पनों बनाय देंउ! बैठ कहूँ जा मत या
भूभरिया में।
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