आउ भेंन बत्तो, बैठ! और बताय, कल तौ बड़ी जल्दी में हुती, रुकी ही नाँय, आधी खबर सुनाय कें ही चली गयी! अब
बताय जंगल के समाचार’न के बारे में
घुटरू पूरी खबर यों है कि
जंगल के सबरे ही जीव-जन्तु अपने-अपने हिस्सा की आजादी माँग रहे हैं! एक झुण्ड तौ
लोमड़ी’न कौ हुतो वा भीड़ में. विन लोमड़ी’न कौ कहनों है कि “ऊपर वाले ने हमको जैसा बनाया है वैसे ही तो हैं हम.
हमने अपने आप को थोड़े ही ऐसा बनाया है. अब अगर चालाकी हामरे DNA में है, तो है. इस पर किसी को कोई आपत्ति क्यों हो? अगर जंगल के राजा शेर
को अपनी मनमानी का शिकार करने का अधिकार है तो हमें भी अपनी क्षमता के अनुसार
चालाकी करने का अधिकार है. हमारी चालाकियों के कारण हम लोगों पर जितने भी केस चल
रहे हैं उन सबको वापस लेना चाहिए और हमारी चालाकी को हमारी विशेषता समझते हुए हमें
संस्थानों में बैठाना चाहिए. राजा और उसके दरबारी कितने भी चतुर बन लें मगर हमारी
चतुराई के आगे सब के सब बौने हैं.”
यै भौत जोरदार खबर है बत्तो! और दुसरे झुण्ड’न के बारे में बताय!
एक झुण्ड हुतो गिरगिट’न कौ! एक तौ वैसें ही ऊपर वारे नें विनें अवाज नाँय दीनी, बड़ी मुस्किल सों चीं चीं कर रहे हुते. रिपोर्टर नें माइक्रोफोन बीच में रख कें कही अब आप सारे एक साथ बोलो, सबरे एक संग बोले तब समझ में आयी कि वे का कह रहे हैं! विन कौ हू कहनों हुतो कि “हमारा जो रंग बदलता रहता है वो हमारे हाथ में थोड़े ही है. जैसे कुत्ते खम्भा देख कर पैर उठा देते हैं, बस वैसे ही हम लोगों का भी रंग बदलता रहता है. मगर साब हमारे रंग बदलने से अबतक किसी का नुक्सान हुआ हो तो बतलाओ? इसलिए हमारी विशेषता को हमारी कमी न समझा जाय और हमारे इस गुण का सदुपयोग करने के लिए हमें मंत्रालयों में जगह दी जाय! कसम से साब हमारी परफोर्मेस इंसानों से बेहतर ही होगी!” घुटरू अब चलों मैं, घर में भौतेरे काम परे भये हैं, तू कहैगौ तौ बाकी समाचार अगली बार सुनाय दोंगी.
अगर यूँ देखें तो कुछ भी गलत
नहीं साहब
इधर का पूर्व, उधर के लिए तो पच्छिम है
नवीन सी. चतुर्वेदी
यै भौत जोरदार खबर है बत्तो! और दुसरे झुण्ड’न के बारे में बताय!
एक झुण्ड हुतो गिरगिट’न कौ! एक तौ वैसें ही ऊपर वारे नें विनें अवाज नाँय दीनी, बड़ी मुस्किल सों चीं चीं कर रहे हुते. रिपोर्टर नें माइक्रोफोन बीच में रख कें कही अब आप सारे एक साथ बोलो, सबरे एक संग बोले तब समझ में आयी कि वे का कह रहे हैं! विन कौ हू कहनों हुतो कि “हमारा जो रंग बदलता रहता है वो हमारे हाथ में थोड़े ही है. जैसे कुत्ते खम्भा देख कर पैर उठा देते हैं, बस वैसे ही हम लोगों का भी रंग बदलता रहता है. मगर साब हमारे रंग बदलने से अबतक किसी का नुक्सान हुआ हो तो बतलाओ? इसलिए हमारी विशेषता को हमारी कमी न समझा जाय और हमारे इस गुण का सदुपयोग करने के लिए हमें मंत्रालयों में जगह दी जाय! कसम से साब हमारी परफोर्मेस इंसानों से बेहतर ही होगी!” घुटरू अब चलों मैं, घर में भौतेरे काम परे भये हैं, तू कहैगौ तौ बाकी समाचार अगली बार सुनाय दोंगी.
इधर का पूर्व, उधर के लिए तो पच्छिम है
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