रेस तो कछुआ ही जीतेगा – ब्रजभाषा व्यंग्य

घुटरू का है रयौ है? आज तौ फ्री दीखै है तू! कछू काम वाम नाँय नें का जो बैठें बैठें जम्हाई लै रयौ है!

आउ भेंन बत्तो, बैठ. हाँ आज कछू खास काम वाम है नाँय सो यों ही बैठें बैठें तराजू तौल रयौ हों मतबल टाइमपास कर रयौ हों. अब अपनी तेरी जैसी आदत तौ है नाँय कि पूछौ न पूछौ बत्तो बोलवे कों हरदम तैयार.
 
घुटरू मोय समझ में नाँय आवै तुम जैसे लोगन कों कैसें हू चैन नाँय परै. अगर मैं जादा बोलों तौ कहौ कि बत्तो भौत बोलता है गयी है, अगर मैं कम बोलों तौ बोलौ कि मैं टेंड़कीबाज है गयी हों और अगर मैं पॉइंट टू पॉइंट बात करवे लगों तौ तुम ही लोग मोय स्वार्थी, मतलबी, खुदगर्ज, सेल्फिस और न जानें कैसे कैसे नामन सों नवाजवे लगौ हौ. अब तू ही बताय मैं करों तौ का करों?
 
छोड़ भेंन बत्तो, सेंटी क्यों है रही है; और बताय का खबर सुन आयी?
 
घुटरू खबर तौ यै सुनी है कि चीन के बनाए भए रोबोट, खिलौना जैसे बन कें रह गये हैं, आदमी’न वारे काम है नाँय रहे विन सों.
 
बत्तो, आज खुद्द आदमी ही जब  आदमी’न वारे काम नाँय कर रहे, ऐसे में रोबोटन सों उम्मीद का रखनी? बल्कि आज के इन्सान कों देखौ तौ वौ खुद्द ही रोबोट बनों भयौ है! मशीनी जीवन जी रह्यौ है. कभू कभू तौ ऐसौ लगै है कि दुनिया एक घड़ी के समान है. और वाकी जो तीन सूई हैं नें वे आज के समाज कों रिप्रेजेंट कर रही होंय. घण्टा वारी सूई तौ गरीबन जैसी लगै है जो सबसों कम स्पीड सों चल रही है. मिनट वारी सूई मिडिल क्लास की तरह चल रही है एकदम धीरें धीरें और सैकिण्ड वारी सूई डिट्टो अमीरन की तरें है, भाजती ही जाय रही है, भाजती ही जाय रही है, बस भाजती ही जाय रही है. अभी देखी तौ यहाँ हुती और नैंक पलक झपकी कि वहाँ पहोंच गयी. मगर बत्तो एक बात नाँय भूलनी चैंयें कि खरगोस कितनी हू तेजी सों भाज लेय, रेस तौ कछुआ ही जीतते रहे हैं
 
उसे हलके में तुम ले तो रहे हो
वो कछुआ है, चलेगा धीरे धीरे
 
नवीन सी चतुर्वेदी

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