नवीन सी. चतुर्वेदी के ब्रजभाषा व्यंग्य आलेख
हिन्दी सामना, मुम्बई द्वारा हर शनिवार को प्रकाशित
मैम! मतलब फुजूल का क्या है – ब्रजभाषा व्यंग्य
नशे को ‘ना’ – ब्रजभाषा व्यंग्य
ऐसी डीपी लगाई लैला ने – ब्रजभाषा व्यंग्य
सेंचुरी और आभार ज्ञापन – ब्रजभाषा व्यंग्य
घुटरू नें सीखी मराठी - ब्रजभाषा व्यंग्य
दिलों में सिर्फ तिरंगा ही चाहिए साहब - ब्रजभाषा व्यंग्य
ब्रजभाषा व्यंग्य – न इल्लंग के भले हैं न उल्लंग के
मछलियों के हक में बगुलों की जमात – ब्रजभाषा व्यंग्य
पापी पेट नाँय जिब्बो रानी है – ब्रजभाषा व्यंग्य
यामें चामर का खसखस भर हू संसय नाँय नें कि हास-परिहास सर्वश्रेष्ठ औषधि है। आप सोच रहे होउगे कि हमनें खसखस और चामर कौ जिकर क्यों करौ है?
रेस तो कछुआ ही जीतेगा – ब्रजभाषा व्यंग्य
हमें चाहिए आजादी भाग 2 – ब्रजभाषा व्यंग्य
हमें चाहिए आजादी भाग 1 – ब्रजभाषा व्यंग्य
नाँय बत्तो, अभी तौ नाँय सुने! अब तू आयी है तौ धीरें-धीरें बिना पूछें सबरे गाम के समाचार सुनवे कों मिलंगे! तू आय जावै तौ दुनिया-जहान की खबर तौ मिल जावै मोय, नहीं तौ कौन है जो बिना पैसा कौ अखबार पढ़ावै, वौ हू विवेचना’न के संग!
ईंधन बचाओ रील बनाओ – ब्रजभाषा व्यंग्य
जागो साक्षर प्यारे – ब्रजभाषा व्यंग्य
चेंटी चेंटा पार्टी – ब्रजभाषा व्यंग्य
आउ भेंन बत्तो, का खबर लायी?
तमासा हक्कू बक्कू का – ब्रजभाषा व्यंग्य
घुटरू यै कैसौ हो-हल्ला है रह्यौ है? इतनों सोर? बालक’न के इंताम हैं, विनें पढ़ाई-लिखाई करनी है, ये लड़वे वारे’न कों कछू सूझै है कि नाँय? त्यौहार’न पै तौ सबके सब बालक’न की पढ़ाई-लिखाई और मरीज’न की बिमारि’न कौ पीटनों पीटते रहें! या समें काहु भलेमानुस की समझ में नाँय आय रही? सबके सब घोड़ा बेच कें सोय गये हैं का?
बहक गयी बत्तो – ब्रजभाषा व्यंग्य
आउ भेंन बत्तो, बैठ, और बताय का खबर लायी है?
चौबीस घंटा मिकी माउस – ब्रजभाषा व्यंग्य
घुटरू भैया, बड़े दिन’न बाद दरसन दिये! कहाँ जाय मरौ हो मरे?
अरे कहूँ नाँय बत्तो, और कहाँ जामंगो? चुनाव है रहे हुते, सो नैंक मोदी जी के संग बिजी हुतो! का कही, तू और मोदी जी!
आँखमारू बट्टा – ब्रजभाषा व्यंग्य
कछू कहौ साब नॉस्टेल्जिया तौ नॉस्टेल्जिया है। याके जैसौ आनन्द और कहूँ नाँय। ऐसौ हम या मारें कह रहे हैं कि आज हमें नॉस्टेल्जिया पै बात करनी है। जब याके विरुद्ध बोलनों होयगौ तब अलग्ग राग अलापंगे। ऐसें ही तौ होवै है।
मिस ऐतराज - ब्रजभाषा व्यंग्य
ऊपर वारे नें सबकों कछू न कछू बिसेस क्वालिटी के संग बनायौ है। जहाँ कछू लोग अकबर-बीरबल जैसे लगें हैं वहीं कछू लोग साक्षात नारद मुनि कौ अवतार दिखाई परें हैं। कछू’न कों देख कें लगै कि पिछले जनम में ये जरूर ही मुनीम साब रहे होमंगे तौ कछू’न कों देख कें लगै है कि इन कौ तौ जनम ही बकालत करवे के लिएं भयौ है।
ट्रम्प की सनक कौ इलाज - ब्रजभाषा व्यंग्य
चौपाल पै चर्चा चल रही हुती कि ट्रम्प नें सबकी नाक में दम कर रखी है. का इत्ती बड़ी दुनिया में एक हु ऐसौ बीर बाँकौ नाँय नें जो या ट्रम्प की सनक कौ इलाज कर सकै? हमनें कही यामें कौन सी बड़ी बात है, ट्रम्प की सनक कौ इलाज तौ एक दिना में ही है सकै.
बड़ी खबर – ब्रजभाषा व्यंग्य
“तुम किसी भी पन्थ का कर लो चयन। आजकल हर मार्ग पर व्यवधान है।“ सच्ची भैया सबेरे कौ टैम होय कि संजा कौ बखत, सहर की काऊ भी सड़क पै निकर जाउ, कुम्भ की भीड़ जैसौ नजारौ देखवे कों मिलै।
सूर्यास्त हो गया – ब्रजभाषा व्यंग्य
एक अप्रैल को सबेरें सबेरें मोबाइल पै मैसेज आयौ कि लॉकडाउन लगवे वारौ है। मैसेज खोल कें देखौ तौ अन्दर लाल लाल अक्षर’न में लिखौ भयौ हुतो ‘अप्रैल फूल’। पढ़ कें चेहरा पै स्माइल तैर गयी और बचपन की अनेक’न कहानी याद आय गयीं। एक कहानी शेयर करों।
कवि जी कविता सुनाओ कविता – ब्रजभाषा व्यंग्य
अब का बतामें साब, कछू बरस पहले की बात है, एक सज्जन कों जब पतौ चलौ कि हम कवि हैं तौ बोलौ “कवि जी कुछ सुनाओ”. हम हू नये नये मुल्ला बने भये हुते, सो भैया एकदम जोस में भर कें बोले
चला मुरारी हीरो बनने – ब्रजभाषा व्यंग्य
देखौ साब, फिर मत कहियो कि बतायी नाँय नीं। स्पष्ट शब्द’न में कह रहे हैं। काहु सों डरें थोरें ही हैं। खलकत में यानी चौरे में कह रहे हैं। एक जैसे चेहरा मोहरा वारे लोग होमें नाँय नें का। बात यै है कि यै अमेरिका वारे ट्रम्प की कहानी नाँय नें।