सनी देओल की पिक्चर कौ वौ डायलॉग है नें तारीख पै तारीख, तारीख पै तारीख, तारीख पै तारीख! ऐसें ही यै दारी कौ ट्रम्प हू टैरीफ पै टैरीफ, टैरीफ पै टैरीफ, टैरीफ पै टैरीफ चिल्लातौ रहै। भाइयो बहनो, आप नें वौ फिल्मी गीत तौ सुनों ही होयगौ – “झूठ बोले कौआ काटे, काले कौए से डरियो, मैं मैके चली जाऊँगी, तू देखता रहियो!”
कभू कभू मोय लगै है कि यै ट्रम्प जो है नें, यै ट्रम्प नाँय नें, यै तौ ट्रम्पनी है, ट्रम्पनी! जब देखौ तब लुगैया’न की तरें धमकी देतौ रहै। या तो पिक्चर दिखाने ले चलो नईं तो मैके चली जाऊँगी! या तो आगरे का लहँगा, बरेली का झुमका और सूरत की साड़ी दिलवाओ नईं तो मैके चली जाऊँगी! या तो घुमाने ले के जाओ नईं तो मैके चली जाऊँगी! या तो नैकलेस दिलवाओ नईं तो मैके चली जाऊँगी! आदि आदि इत्यादि!मोदी जी नें ट्रम्प कों समझायौ हुतो कि ट्रम्प बाबू, कूटनीति से काम लो! अब ट्रम्प ठहरौ पढ़ा
लिखा अँगूठाछाप! वानें कूट कौ अर्थ कुटाई समझौ! कूटनीति यानी कुटविद्या वारी नीति!
मोदी जी तौ समझे कि “एक नें कही दूजे नें मानी, गुरुनानक कहें
दौनों ज्ञानी”, मगर भैया “जा के पाम न फटी बिवाई, वौ का जानें पीर पराई”! ट्रम्प जैसे’न के लिएं ही तौ कह्यौ जावै है कि “जो
लोग मुँह में चाँदी का चम्मच लेकर पैदा होते हैं उन्हें दुनियादारी समझने में समय लगता
है!” कछू लोग ट्रम्प कों अमेरिकन पप्पू हू कहवे लगे हैं! इतनों ही नाँय, जिनमें हिम्मत है, वे तौ अब खुलेआम ट्रम्प सों यहाँ तक
कहवे लगे हैं कि
उखड़ चुके हैं ज़मीं से तुम्हारे पाँव, मगर
तुम्हें दिखाई नहीं देगा, तुम हवा में हो
नवीन सी. चतुर्वेदी
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