ब्रजभाषा व्यंग्य – दिवाली सेल

घुटरू आज के अखबार की खबर पढ़ी का?

 

नाँय बत्तो अभी तक तौ नाँय पढ़ी, कछू खास खबर है का?

 

हाँ भौत ही खास खबर है, अपने एरिया में जो शोपिंग मॉल है नें वा में सेल लगी भई है, पचास परसेंट छूट पै माल बेच रहे हैं!

 

अरे बावरी इत्ती बड़ी है गयी तू अभू नाँय समझी, रुपैया कौ माल आठ-आना में बेच कें बनिया कों अपनी लुटिया डुबानी है का? अरे बावरी पहली बात तौ यै कि वामें लिखौ भयौ है अप-टू फिफ्टी परसेंट डिस्काउंट मतबल सबरे माल पै पचास परसेंट डिस्काउंट नाँय नें, काहू-काहू पै पाँच परसेंट हू होयगी। जा पै पचास परसेंट बतामें वौ माल तौ पहले दिन ही वैसें ही खतम है जावै जैसें कि लोकतंत्र अवतार लेते ही अन्तर्ध्यान है गयौ! तब सों अबतक लोकतंत्र के नाम पे मजमा लगौ भयौ है बस! जनता तौ हमेसा सों ऐसी ही रही है, बाबरे गाम में ऊँट आयौ होय ऐसौ तमासौ चल रयौ है बस, तू समझी?

 

अरे बाप रे यै तौ मैं नें देखौ ही नाँय नो!

 

बत्तो दूसरी बात यै कि वाके संग एक स्टार यानि सितारौ हू बनों होवै है; नीचें लिखौ होवै शर्तें लागू! सौ में सों निन्यानवें तौ या पै ध्यान देवें ही नाँय नें और अगर कोऊ सियानों सवाल उठायवे की सोच हू लेय तौ वा के क्रिया करम कौ इंतजाम पहले सों ही कर रखौ होवै है।

 

घुटरू ऐसौ तौ पहलें हू होत रयौ है, तोय याद है एक बार झुमरीतलैया में छोरा वारे छोरी देखवे आये छोरी देख कें ब्याह नक्की है गयौ ब्याह के बाद सुहाग रात कों जब घूँघट खुलौ तौ पतौ चली कि यै तो कहीं पै निगाहें कहीं पै निशाना वारौ केस है, सिकायत करी तौ छोरी की मैया नें कह दीनी कि आपने ही तो कहा था कि आपको संस्कारी लड़की चाहिए और हमने आपको बताया भी था कि हमारी लड़की बहुत ही संस्कार वाली है नजर मिला कर बात नहीं करती!

 

हाँ बत्तो फिर वौ बिचारौ छोरा जिन्दगी भर अपनी बहौरिया की एक नजर कों वैसें ही तरसौ जैसें कि अपुन सब सुख-चैन के लिएं तरस रहे हैं! जब देखौ तब बिचारौ यै ही गातौ रहै

 

मेरे दिल की तसल्ली कहाँ गुम हो तुम

जिन्दगी में तुम्हारी कमी रह गयी”

 

नवीन सी. चतुर्वेदी


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