उजालों ने किनारा कर लिया क्या
आज घुटरूमल जी कौ मन भयौ कि काहु कौ इण्टरव्यू लियौ जाय। अजीब-अजीब सौक चर्राते रहें
इन्हें। कभू इण्टरव्यू दैवे कों मचल परें तौ कभू इण्टरव्यू लैवे की जिद्द करन लगें।
पंच-तत्व’न सों निर्मित या नश्वर-संसार
में इण्टरव्यू हू पंच-तत्व’न पै आधारित रहै। इण्टरव्यू लिवैया,
दिवैया, छपैया, खरचैया
और पढ़ैया।
हमेसा की तरें घुटरूमल जी सौक चर्राते इ हमारे पास आये।
बोले इण्टरव्यू लैनों है, कौन कौ लैमें? एक मिनट कों हमें ऐसौ लगौ जैसें वे पूछ रहे होंय भैया बकरा
बनानों है, कौनें बनामें?
वैसें मकसद यै ही हुतो। हमनें कही दूर कहूँ क्यों जाउ; अपनी फेसबुक
फ्रेंडलिस्ट खँगारौ, भौतेरे मिल जामंगे। जाय कोउ न पूछ रह्यौ
होय ऐसे आदमी कों आप बकरा बनाय सकौ मतबल वा कौ इण्टरव्यू लै सकौ। फिर बोले छपामें
कहाँ? हमनें कही कहूँ और क्यों जानों? अपनों खुद्द कौ दो-चार
पन्ना वारौ अखबार चालू कर लेउ। गल्ले’न छपास के मारे भरे परे
हैं। विनें छाप-छाप कें नोट छापते रहियो। या तरियाँ पंच-तत्व’न में सों इण्टरव्यू लिवैया,
दिवैया और छपैया ये तीन फायनल है गये।
अब घुटरूमल बोले भैया मौला करै मदार किसी के सर के ऊपर, खरचा कौ का? खरचा कहाँ
सों निकसैगौ? हमनें कही एक बकरा तौ मिल ही
चुकौ है जाकौ कि इण्टरव्यू छपनों है। बाकी खरचा के लिएं आप कोरोना-काल वारे विन दस आदमी’नें खोजौ जिन दस’न नें मिल कें एक केला देते भए फोटू
खिंचवाए हुते। ऐसे सज्जन आपकौ खरचा उठाय लंगे। खरचा कौ समाधान मिलते ही घुटरूमल जी
ऐसें प्रसन्न भये जैसें नेता कों चुनाव की टिकट मिल गयी होय। आश्वस्त है कें बोले
भैया भौत-भौत आभार आप नें हमारौ काम असान कर दियौ। अब हम चलें।
हमनें विनके उत्साह कों बनाएं रखते भए पूछी प्रभु चार-तत्व’न पै तौ चर्चा है
गयी, पाँचवे की चिन्ता नाँय नें का? वे बोले पाँचवौ कौन?
हमनें कही पाँचवौ वौ जो सबसों खास है। जा के बिना सब सूनों है। जाते पाठक कहें। जा
कों जनता-जनार्दन कहें। हमारी बात सुन कें कुटिल-मुस्कान
बिखेरते भए घुटरूमल जी बोले गुरूजी या पाँचवे की जब बड़े-बड़े
अखबार, मैगजीन, चैनल यहाँ तक कि सरकार
वारे ही नाँय सोच रहे तौ अपुन ही अपनों दिमाग क्यों खपामें। घुटरूमल जी की बात सुन
कें हमें वौ सेर याद आय गयौ
धरती पै तारे लायवे की जिद्द हमनें चों करी
जब कर द’ई तौ रात की सत्ता पै हैरानी है चों
नवीन सी. चतुर्वेदी
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