घुटरू एक बात तौ बताय!
यै आजकल सब जगें जो एक चर्चा
चल रही है कि “ईश्वर है कि नाँय” यै जरूरी है का?
बत्तो, मैं समझौ नाँय!
घुटरू अनाड़ी मत बन, सीधी-सीधी तौ पूछ रही हों कि यै जो चर्चा चल रही है कि
“ईश्वर है कि नाँय” यै चर्चा जरूरी है का?
फिर वौ ही बात बत्तो! मैं अनाड़ी
नाँय नों मगर यै हू जानों कि भोरी-भारी सी दिखवे
वारी ब्रज की गोपी बड़ी सयानी होमें हैं! इननें उद्धव जैसे कों ब्रजरज चखवाय दीनी हुती, तू पूछ रही है तौ कछू कारण जरूर है, या मारें पतरी गली
सों निकस कें डायरेक्ट हाईवे पै आ!
सीधी बात तौ यै है घुटरू कि चर्चा
तौ याकी होंनी चैंयें कि हमारे फेंफड़े’न की ऐसी की तैसी करवे वारौ प्रदूसन कब बन्द
होयगौ? चर्चा करनी ही है तौ याकी करौ कि सबरे देस ही अगर करजा उठाय रहे हैं तौ यै ब्याजड़िया
है कौन जानें पूरी दुनिया कों कर्जदार बनाय दियौ है? और अगर सब कर्जा उठाय रहे हैं
तौ कर का रहे हैं? और जो कर रहे हैं वा कौ गरीब-गुरबा’न
कों कितनों फायदा पहोंच रह्यौ है? या करजा कों कबतक उतारौ जायगौ? कैसें उतारौ जायगौ?
कौन उतारैगौ? आदि-आदि इत्यादि।
बत्तो तोय कित्ती बार समझायौ
है कि सेंटी मत होउ कर! यै दुनिया है, यै ऐसें ही चलौ
करै है! यहाँ काम करवे वारे कम और गाल बजायवे वारे जादा हैं! यहाँ समझायवे वारे सों
जादा कीमत उलझायवे वारे’न कों मिलै है! यहाँ मतलब की कम और बेमतलब की बात जादा होमें
हैं! और अपुन हू कम हैं का, अपुन लोग’न कों हू तौ फोकट के तमासे
देखवे में जादा मजा आवै है!
घुटरू सुलझायवे की जगें उलझावै
मत! बात कौ जवाब दै!
बत्तो, वैसें तौ अपने यहाँ सब गणेश हैं और गणेश कों बुद्धि कौन देय? लेकिन चोंकि तैंनें
पूछी है तौ सुन - ईश्वर के हैवे न हैवे पै तौ हमारे वेद पहलें
ही नेति-नेति कह चुके हैं। ये तौ आधुनिक विद्वान हैं जो नेति-नेति कौ वास्तविक अर्थ समझवे और समझायवे की बजाय अपनी-अपनी ढपलि’न पै अपने-अपने राग बजाएं जाय रहे हैं। वासों
हु बड़ौ अचरज यै कि धरम के विरोधि’न नें हू धरम कों कारोबार बनाय रखौ है! वैसें जो लोग
ईश्वरीय सत्ता में यकीन नाँय रखें हैं विनें हू इत्ती बात तौ समझ ही लैनी चैंयें कि
वगरना आदमी शैतान से कुछ कम नहीं साहब
खुदा गर वह्म है तो भी निहायत ही जरूरी है
नवीन सी. चतुर्वेदी
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