भैया घुटरू, हैप्पी पुरुष दिवस!
तू नाँय जानें? अरे बावरे
जैसें फादर डे होवै, मदर डे होवै, वुमन डे
होवै, डॉटर डे होवै वैसें ही मेन्स डे हू होवै है।
अच्छा तौ आज हमारौ दिन है, चल थेंक यू भेंन। तू कह रही है तौ मान लेंउ। वैसें भौत सारे जीव-जन्तु, वे ही जो बाय डिफॉल्ट सनातन के शत्रु जैसे
प्रतीत होमें हैं, विनके अनुसार तौ हर दिन ही पुरुष-दिवस है, जब देखौ तब पितृ-सत्तात्मक
व्यवस्था के बहानें मर्द’न पै ही गर्द उड़ाते रहें और ऊपर सों यै जुमला तौ है ही कि
मर्द को दर्द नहीं होता है। जब ये लोग कहें नें कि मर्द को दर्द नहीं होता है तौ
ऐसौ लगै जैसें कि कह रहे होंय मर्द को दर्द होना ही नहीं चाहिए।
घुटरू तू तौ सेंटी है रयौ
है।
नाँय बत्तो मैं सेंटी नाँय
है रयौ जो है सो बताय रयौ हों। तू ही बताय तैंनें कितने मर्द’न कों अँसुआ बहाते
देखौ है? हंसिनी बने भये हंस’न की बात नाँय कर रयौ, वे
हंस जो हंस बन कें ही जी रहे हैं विनकी बात कर रयौ हों।
हाँ घुटरू बात तौ तू सही कह
रयौ है। है अटपटी मगर बात एकदम खरी है। हम लुगैया
हू मर्द’न कों अलग-अलग नजरिया सों देखें। जैसें कि अगर मर्द हमारे
बाप-भैया हैं तौ विनके दुख तौ दुख लगें किन्तु यदि मर्द हमारौ मर्द है मतबल हमारौ
हसबैंड है तौ दृष्टिकोण पूरी तरह बदल जावै है। वैसें तुम मर्द’न के संग हू तौ ऐसौ
ही है, है नें? मैया-भेंन’न के लिएं
अलग नजरिया और बहौरिया के लिएं अलग!
हाँ बत्तो अपुन दौनों’न कों
सच्च बोलवे कौ मरज है। दूर के ढोल ही सुहाने लगें। अति सर्वत्र वर्जयेत। वैसें काय
के महिला-दिवस और काय के पुरुष-दिवस!
वे ही दिन वे ही रात वे ही बात वे ही हालात बस सोशल मीडिया पै नैंक हैप्पी-हैप्पी है जावै है बस। और तू बताय
आज तैंनें तेरे पुरुष कों हैप्पी पुरुष-दिवस कैसें विश करौ?
अरे का बताओं घुटरू फेसबुक
खोली तब पतौ चलौ कि आज पुरुष दिवस है, मैं नें तौ
सवेरें उठते ही तेरे जीजाजी सों कह मारी उठौगे नाँय? सोते ही रहौगे? आलू खतम है
गये हैं नैंक ले आऔ! और विन बिचारे’न नें कछू कहे बिना बस मोय मुस्कुराय कें देखौ
और आलू लैवे चले गये!
सदा सच्चिदानन्द मय, करता नहीं गुमान
नर, नारायण है वही, जो है दया-निधान
नवीन सी चतुर्वेदी
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