ब्रजभाषा व्यंग्य – बिमारि’न के खरीदार

 हमनें गाड़ी खरीद लीनी है

इक बिमारी खरीद लीनी है

 

यै का बात भई घुटरू? गाड़ी और बिमारी कौ का सम्बन्ध। गाड़ी तौ सुक्ख है, सुविधा है, ठाठबाट कौ प्रतीक है, सभा-सोसायटी में रसूख बढायवे वारी चीज है तू याकों बिमारी कैसें कह सकै? दिमाग घूम गयौ है का तेरौ?

 

नाँय बत्तो, दिमाग एक इंच का एक मिलीमीटर हू नाँय घूमों। अपनी जगे पै एक टाँग सों खड़ौ है कें तपस्या कर रह्यौ है जुग्ग’न सों। नैंकू टस सों मस नाँय भयौ। जो कह रह्यौ हों वाकौ कारण है। देख गाड़ी आय गयी, अब पहलें तौ चलवौ-फिरवौ कम होयगौ, फिर धीरें-धीरें बन्द है जायगौ। घर-ऑफिस में तौ एयर कंडीशन में बैठे ही रहें अब रस्ता पै हु ऐ सी में ही चलौ करंगे। वाके बाद घोंटू’न की समस्या, कमर की समस्या, पीठ की समस्या और इनके संग बतौर बोनस विटामिन डी की कमी। इतनों ही नाँय और हू अनेक’न समस्या एक पै एक फ्री की तरें आती जामंगी।

 

घुटरू मोय तौ लगै जो खरचा बढ़वे वारौ है तोकों वाकी चिन्ता खायें जाय रही है।

 

नाँय बत्तो गाड़ी वारे खरचा की चिन्ता नाँय सताय रही। गाड़ी पै जितनों खर्चा होयगौ वासों जादा के तौ घोंटू’न के मुड़ामन है जामें साल भरे में। मोय तौ बिना मतलब की जो अनेकन’न बिमारी घर-भर में घुसंगी और विन पै जो पैसा के संग-संग सुख-चैन कौ भट्ठा बैठैगौ वाकी चिन्ता है रही है।

 

घुटरू तू तौ मोबाइल’न के बारे में हू चाँय जो बोलतौ रहै! फोंन बिना तेरौ खुद कौ गुजारौ है का?

 

बत्तो फोंन बिना गुजारौ नाँय नें यै बात सौ फीसदी सही है। विकास होतौ रह्यौ है होतौ रहनों चैंयें। नो प्रॉब्लम। मगर यों समझ घी सेहत के लिएं कितनों हू लाभकारी क्यों न होय का हम चौबीसौ घण्टा घी पीते रह सकें? जाय देखौ वौ ही जब देखौ तब मोबाइल सों ही चिपकौ मिलै। अरे भैया जिनकी लिखा-पढ़ी मतबल कामकाज मोबाइल पै होमें विनकी बात समझी जाय सकै मगर यै का कि दुनिया भर की फालतू पंचायत हू आठ-पहर फोंन पै ही चल रही हैं!

 

घुटरू तेरी यै बात तौ ठीक है। बच्चा हू भौत बिगर गये हैं या ते। अब तौ लोंन दैवे वारे फोंन’न पै लोंन हू दैवे लगे हैं। बटन दबाते ही मिलवे वारे लोंन की किस्त जब गलौ दबामन लगें तब नस-नस बोल उठै कि

 

फोंन पै लोंन का लियौ हमनें

पीर भारी खरीद लीनी है 

 

नवीन सी. चतुर्वेदी

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