ट्रम्प की सनक कौ इलाज - ब्रजभाषा व्यंग्य

चौपाल पै चर्चा चल रही हुती कि ट्रम्प नें सबकी नाक में दम कर रखी है. का इत्ती बड़ी दुनिया में एक हु ऐसौ बीर बाँकौ नाँय नें जो या ट्रम्प की सनक कौ इलाज कर सकै? हमनें कही यामें कौन सी बड़ी बात है, ट्रम्प की सनक कौ इलाज तौ एक दिना में ही है सकै.

सब हमारी तरफ देखन लगे. हमनें कही भौत ही असान है. सबसे पहले तो इसको इण्डिया लाया जाय, दिल्ली में उतारा जाय, जमना घाट पर लेकर जाया जाय, फिर कहा जाय कि ट्रम्प बाबू अगर आप को चुनाव जीतना है तो जमनाजी में गोता लगाओ. यै नखरे करैगौ, बोलैगौ – पानी गन्दा है, मगर कह्यौ जाय कि चुनाव जीतना है तो गोता तो लगाना ही पड़ेगा. चुनाव कौ लालच दै’कें नेता’न सों कछू भी करवायौ जाय सकै. चुनाव में हिन्दू नेता’न कों मजार पै चादर चढ़ाते भए और मुस्लिम नेता’न कों मन्दिर’न में ढोक लगाते भए खूब देखौ है हमनें. खैर अपुन कों का? अपुन तौ ट्रम्प की बात कर रहे हैं. देख लीजो चुनाव कौ नाम सुनते ही नाक बन्द करकें गोता लगाय लेयगौ. पतौ है फिर का होयगौ? प्रदूषित पानी के कारन वाके सिगरे सरीर में खुजरी हैवे लगैगी. दिनरात ईरान-ईरान चिल्लायवे वारौ खुजरी-खुजरी चिल्लायवे लगैगौ. वाके बाद याकों वृन्दावन लाय कें बन्दर’न के बीच में छोड़ दियौ जाय. न चश्मा बचैगौ, न पर्स. दुनिया कों दौड़ायवे वारौ बन्दर’न के पीछें-पीछें न भाजै तौ कहियो. वाके बाद याकों लोटा भर कें भाँग पिवायी जाय और भाँग पिवाय कें याकों बर्र के छत्ता के नीचें खड़ौ कर दियौ जाय फिर बर्र के छत्ता में खेंच कें एक ढेला मारौ जाय. म्हों फुलायवे कौ भौत सौक है नें याकों! वे बर्र या दारी के कों ऐसी-ऐसी जगें सुजामंगी कि दुबारा म्हों फुलायवौ भूल जायगौ.  वाके बाद जो करैगी भाँग करैगी. भाँग के नसा में यै सोय जावैगौ. सोय कें उठैगौ तबतक याकौ दिमाग ठिकानें लग चुकौ होयगौ. दुनिया में शान्ति स्थापित है चुकी होयगी. वाके बाद याकों टटिया-स्थान पै मोहिनी-बिहारी जी के दरसन करवाये जाएँ, जैसें ही यै मोहिनी-बिहारी जी के दरसन करैगौ, याके ज्ञान चक्षु खुल जामंगे, यै समझ जावैगौ कि “जो सुख पायौ रामभजन में, सो सुख नाँहि अमीरी में” और भैया या तरें एक ही दिन में याकी सनक कौ इलाज है जायगौ. फिर याकों समझायौ जाय 

 

हेकड़ी टाँग देउ खूँटा पै

हर सिकन्दर नें धूर चाटी है

 

नवीन सी. चतुर्वेदी

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