न जाने कैसी शिक्षा हो रही है
बत्तो बधाई है, तेरी लाली भौत अच्छे
नम्बर’न सों पास भयी है। आगें का पढ़ाई करवायवे कौ विचार है?
घुटरू तो कों हू बधाई, तेरौ हू लाला चोखे
नम्बर’न सों पास भयौ है। तू अपने लाला कों कौन सी दिसा में लै जायवे की सोच रयौ
है?
बत्तो कछू ठीक सों समझ में नाँय आय रही
याही मारें तो सों पूछी? वैसें तेरी लाली कौ कौन सी लाइन में इंटरेस्ट है? वा कौ
रुझान कौन से विषय में है?
अब का बताओं घुटरू नासपीटी जब देखौ
तब मोबाइल में ही घुसी रहै। रील देखती रहै। मैसेज वैसेज करती रहै। आजकल के बालक’न
सों कछू बोल हू तौ नाँय सकौ। अपनों जमानों अलग हुतो। घर वारे’न कौ नम्बर तौ बाद
में आतो गली मुहल्ला के पहलें ही धर कूटते।
हाँ बत्तो सही कह रही है अपुन लोग
भाग्यशाली रहे कि बड़े बुजुर्ग’न की निगहबानी में पले बढ़े। जैसें कोऊ कुम्हार सलीका
सों चाक पै बरतन बनावै ऐसें हम लोग’न कों गढ़ौ गयौ है। तेरी लाली की तरें मेरौ लाला
हू मोबाइल में ही घुसौ रहै। बजमारे’न नें इत्तौ मगज किताब’न में लगायौ
होतो तौ आज अपुन मैया बाप धक्का न खाय रहे होते। नास जाय इन तरें तरें की एप
बनायवे वारे’न कौ जो हमारे बाल बच्चा’न कों भटकाते रहें।
घुटरू यै गलत बात है। चॉकलेट की
कम्पनी तौ चॉकलेट के गुण ही बतावैगी। अवगुण तौ हमें तुमें बताने होमें हैं। अपने
जमाने में सत्यकथा और मनोहर कहानियाँ नाँय आतीं का? मगर मजाल है जो अपने घर वारे’न
नें अपुन लोग’न कों भटकन दियौ होय? और घुटरू बच्चा’न कों दोस दैवे सों पहलें यै
कैसें भूल जामें कि आजकल के अपुन मैया बाप होंय कि बड़े बूढ़े सब के सब दारी के
मोबाइल’न में ही घुसे रहें।
हाँ बत्तो बात तौ तू साँची ही कह रही
है। वैसें जो पढ़ाई अपने जैसे मिडल क्लास के लोग अपने बच्चा’न कों पढ़ाय सकें वे पढ़ाई
हू तौ कुशल श्रमिक तैयार नाँय कर पाय रहीं। लाख’न की पढ़ाई के बाद लाख’न के
डिप्लोमा और वा के बाद हू हाथ में आवै बाबाजी कौ ठुल्लू। पहले जमाने में पढ़ लिख
कें कम सों कम क्लर्क तौ बन ही जाउ करते अब तौ सच्चऊँ पढ़ पढ़ कें पत्थर भये जाय रहे
हैं।
किस तरह ढाढस बँधाओगे उन्हें तुम
डिग्रियाँ लेकर के भी जो रहे हैं
नवीन सी.
चतुर्वेदी
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