बड़ी खबर – ब्रजभाषा व्यंग्य

 “तुम किसी भी पन्थ का कर लो चयन। आजकल हर मार्ग पर व्यवधान है।“ सच्ची भैया सबेरे कौ टैम होय कि संजा कौ बखत, सहर की काऊ भी सड़क पै निकर जाउ, कुम्भ की भीड़ जैसौ नजारौ देखवे कों मिलै।

जैसें कुम्भ के मेला में लोग रेंग रेंग कें चल रहे होंय या जैसें वृन्दावन के बाँके बिहारी मन्दिर की सँकरी गली’न में लोग एक दूसरे सों चिपके भए तिल तिल कर कें सरक रहे होंय, महानगर की सड़क’न पै हु यही दसा देखवे कों मिलै है। बम्पर टू बम्पर। अब ऐसे में आदमी का करै? कोउ गाने सुनें, कोउ फोन पै बात करै और कोउ फोन पै समाचार देखै सुनें। हम हू एकदिन ट्रैफिक जाम में फँस गये हुते! का करते? समाचार सुनवे लगे। समाचार तौ कहवे के रह गये हैं अब। आधे ते जादा तौ विज्ञापन भरे परे रहें। और बीच बीच में ‘बड़ी खबर बड़ी खबर’ कौ घण्टानाद और होतौ रहै। बड़ी खबर न भयी अकासबानी है गयी! हमें याद आवै है पहलें जैसें ही ‘बड़ी खबर’ ये दो शब्द कान’न में परते वैसें ही कान खड़े है जाते। मगज एकदम अलर्ट मोड में आय जातो। और भैया वा जमाने में बड़ी खबर, बड़ी खबर जैसी लगती हू हुती। अब तौ बड़ी खबर की कहानी भेड़िया आया जैसी है गयी है। सुन सुन कें पके चुके हैं लोग।

 वैसें बड़ी खबर अब बड़ी खबर जैसी लगें हू कहाँ हैं? न हमें सुद्ध हवा मिल रही है न सुद्ध पानी का यै कोउ छोटी मोटी खबर है? साग, फल, दूध, दही, घी, तेल सब में मिलावट है का यै कोउ छोटी मोटी खबर है? आमदनी अठन्नी खरचा रुपैया - का यै कोउ छोटी मोटी खबर है? हर घर कौ ड्रॉइंग रूम जलसाघर बन चुकौ है का यै कोउ छोटी मोटी खबर है? जिन्हें जवाब दैने चैंयें वे स्वयं सवाल’न सों घिरे परे हैं का यै कोउ छोटी मोटी खबर है? और तौ और जा गोल्ड कों सबसों सुरक्षित निवेश मानों जातो अब वौ हु सट्टेबाज’न के हाथ’न की कठपुतली बन कें रह गयौ है का यै कोउ छोटी मोटी खबर है? का कहें भैया, अब तौ बड़ी ते बड़ी खबर हू छोटी मोटी खबर जैसी ही लगै है! या मारें ही तौ कहनों परै कि

 

खमोशियों को इशारों से भी रहा परहेज

वगरना कैसे कोई शब को शाम लिख देता

 

नवीन सी. चतुर्वेदी

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