ब्रजभाषा व्यंग्य – बड्डी वारी मोटर कौ पानी

बत्तो जमना जी नहाय आयी लगै?

       नाँय घुटरू, अब तौ घर में ही नहाय कें जाओं! हाँ चौमासे में जमना नाहयवे कौ आनन्द अवश्य लेंउ, बाकी दिन’न में तौ अपने घर की नल भली?


       तेरे घर में नल आमें बत्तो?


       समझी, तू चुंगी की यानी नगरपालिका वारी नल की पूछ रह्यौ है नें घुटरू?


       हाँ बत्तो, मैं तौ वौ ही समझो!


घुटरू, चुंगी की नल कौ पेंड़ौ देखें तौ नहायवे की छोड़ सवेरे वारे काम हू न है पामें! यै तौ हम लोग’न नें मिल-मिलाय कें कछू सरकारी कछू अन्य लोग’न सों सहायता लै कें बड्डी वारी मोटर लगवाय लीनी है महौल्ला में, वाके सुक्ख हैं बस!


        बत्तो मोय लगै यै चुंगी कौ पानी तौ जुग्ग’न सों नाँय आय रह्यौ! पहलें हू मोटर’न पै ही निर्भर हुते!


       हाँ घुटरू, समस्या तौ भौत पुरानी है। पहलें हू जुगाड़ पै निर्भर हुते, अभू जुगाड़ के ही भरोसे हैं! पतौ नाँय सरकार टैक्स काय बात कौ लेती रहै! मगर पूछें कौन सों? जासों पूछौ वौ ही नहार सौ गुर्राय परै!


       याकौ मतलब बत्तो, वौ पुरानी मोटर खराब है गयी होयगी? सो यै नयी मोटर लगानी परी है?


        घुटरू, वा जगे कौ पानी खतम है गयौ हुतो सो नयी जगे ते पानी ढूँढ कें यै नयी व्यवस्था करी गयी है!


       और बत्तो मैंनें सुनी वा पुरानी जगे के आसपास मकान फटवे और ढहवे की घटना हू घटी हुतीं!


       हाँ घुटरू, एक दो नाँय गल्ले घटना घटी हुतीं! चार दिन हो हल्ला भयौ हुतो, फिर वौ ही जीवन! उठौ, खाऔ, पिऔ, सोय जाऔ! फोटू वारे फोटू खेंच लै जामें, अखबार वारे खबर छाप देमें, नेता लोग नेतागिरी झार जामें, यों समझ सब आमें तौ हैं हमारी प्यास बुझायवे के लिएं मगर हकीकत में सब के सब अपने अपने घड़ा भर रहे होमें हैं!


       बत्तो यै तौ सोच अगर या नयी जगे कौ पानी हू खतम है गयौ तौ? यहूँ जमीन धँसवे लगी तौ?


       सुन भैया घुटरू, जो भयौ सो देख्यौ और जो होयगौ वौ हु देख लंगे! चौंकि अब तौ ऐसौ लगै है जैसें वीर भोग्या वसुन्धरा घोड़ा बेच कें सोय गयी होय! कौन सों उम्मीद लगामें? जिन्हें कुटिया बचानी चैंयें वे ही लुटिया डुबायवे में लगे भये हैं! चल परें हट, जामन दै, मोय घर के काम हू देखने हैं! तेरौ का? तोय तौ परसी थरिया मिल जावैगी! और सुन

 

हर नवीन लड़ने वाला असमंजस में पड़ जाता है

किस-किस अर्जुन को कबतक गीता के पाठ पढ़ायें हम

 

नवीन सी चतुर्वेदी

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