ब्रजभाषा व्यंग्य – तू खींच मेरी फोटो पिया

घुटरूमल जी फिल्मी गीत’न के जबरदस्त सौकीन. नैंक मूड बन्यौ नाँय कि गामन लगे. इन पै गायवौ नाँय आवै यै अलग बात है मगर इनकौ मोबाइल टॉप के गीत’न सों भर्यौ रहै. पवित्र नगरी उज्जैन में महाकाल के दरसन करवे गये हुते. 

दरसन करवे के बाद हलकी हलकी शिव जी की बूटी लै कें, मिजाज बनाय कें, होटल के कमरा में डिम लाईट के संग इन नें एफ एम् लगायौ. गानों बज रह्यौ हुतो – जीने का मजा ले साथिया, तू खींच मेरी फोटो तू खींच मेरी फोटो तू खींच मेरी फोटो पिया.

 

अब बिचारे एफ एम् वारे’न कों थोरें ही पतौ हुतो कि घुटरूमल जी क्वारे हैं. आज के नाँय जी बरस’न ते. ऐसौ हू नाँय कि इन नें बल्ला नाँय घुमाये, मगर का करें साब? मजाल है कि ढंग की एक हू गेंद बल्ला पै आयी होय! और अगर आय हू गयी होय तौ स्कोर बन गयौ होंय! भूलें बिसरें एक आध अरगल परगल सों निकसी हू तौ बैट कौ किनारौ छी कें हवा में लहराती भई, बलखाती भई स्लिप में खड़े खिलाडी के हाथ’न में पहोंच गयी. ये स्लिप वारे खिलाड़ी हु बड़े खतरनाक होमें हैं. तुम नैंक चूके और गेंद इन के हाथ’न में.

 

यों तौ घुटरूमल जी तमीज वारे व्यक्ति हैं परन्तु वा दिन विन कौ मूड खराब है गयौ, मन ही मन बुदबुदान लगे, भाड़ की भट्टी में जाँय ये एफ एम् वारे, नासपीटे’न कों यै ही गानों मिल्यौ, सिगरे मूड की बंसी बजाय दीनी.

 

घुटरूमल जी के माध्यम सों अनेक बार स्लिप में खड़े खिलाड़ि’न कौ भलौ भयौ, पीछें खड़े विकेट कीपर’न के हू भाग खुले; और समझौ कभू कोऊ गेंद बल्ला पै आय हू गयी, बल्ला घूम हू गयौ, शॉट लग हू गयौ तौ भैया ग्राउंड में चारों तरफ गेंद कैच करवे कों जो खिलाड़ी तरस भटक रहे होमें हैं नें, विन में सों काहू की लॉटरी लग गयी. कुल मिलाय कें बिचारे घुटरूमल जी अनजाने में समाजसेवा करते भये, गुजराती कहावत “लगनै लगनै कुँआरा” कों चरितार्थ करते भये, बिस्तर के दौनों तरफ सों उतरवे कौ आनन्द लेते रहे. मगर वौ कहें नें कि जब तक श्वास तब तक आस, सो घुटरूमल जी आज हू वौ गानों गाते तौ रहें - जीने का मजा ले साथिया, तू खींच मेरी फोटो तू खींच मेरी फोटो तू खींच मेरी फोटो पिया.

 

नवीन सी. चतुर्वेदी

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