हमारा दिल तो खयालों की धर्मशाला है
बत्तोरानी बोलीं गुरूजी बचपन सों लै
कें अब तक बस यै ही देखौ और सुनों है कि “जिनके परे सुभाउ जात नहिं जी सों, नीम न मीठे होंय
भलें सींचौ गुड़ घी सों।“ मामलौ कछू भी होय नेता अपनी हरकत’न सों बाज नाँय आमें,
एक दूसरे की टाँग खेंचे बिना मान नाँय सकें। मगर या बार तौ सूरज
सच्चऊँ पच्छिम ते उग गयौ। कहवे में अटपटौ लगै मगर जैसें काहू बाहर सों आयवे वारे
पै गली के सिगरे फलाने मिल कें टूट परें, वाय खदेड़ कें ही मानें,
या समय तौ ऐसौ ही देखवे कों
मिल्यौ।
बत्तोरानी की बात कौ समर्थन करते भए
घुटरूमल हु बोले हाँ गुरूजी पहली बार ऐसौ लगौ कि पूरौ देस एक सुर में बोल रयौ है। पहलगाम
में जो नापाक हरकत भयी वानें भारतीय जनमानस की आत्मा कों झकझोर कें रख दियौ। हर
तरफ सों एक ही अवाज आयी ‘मारो सालों को’ और गुरूजी अपनी सेना नें हु जौहर दिखायवे
में कसर नाँय रखी। घर में घुस कें मारौ और ऐसौ मारौ कि अगलौ चोट तक नाँय दिखाय पाय
रह्यौ।
बत्तो आगें बोलीं घुटरू अब दूसरी बात
सुन। हम लुगैया’न कौ तौ बस नाम ही बदनाम है तैंनें देखी या घटना के बाद नेता’न नें
कैसे-कैसे मेकअप करे और करवाये हैं। सबनें अपनी-अपनी इमेज
सुधारवे पै फुल फोकस रख्यौ है। सबनें अपने-अपने चेहरा चमकाये
हैं। भगवान करै काहू की नजर न लगै और ऐसौ अच्छौ माहौल बन्यौ रहै बल्कि और बेहतर
होतौ जाय।
घुटरूमल बोले हाँ बत्तो तू सही कह
रही है भगवान करै अपने देस कों फिर सों काहू की नजर न लगै। दो बात और जरूरी लग रही
हैं जिनपै सरकार और अपुन सब देसवासी’न कों हु ध्यान दैनों चैंयें। पहली तौ यै कि
या अच्छे माहौल में हु जो अपनी हरकत’न सों बाज नाँय आय रहे, अभू अंट-संट बकें जाय रहे हैं, ऐसे अकल के अन्धे’न कों अपुन
सब नजरबट्टू समझ लेंय। टँगे रहन देमें ऐसे नजरबट्टू’न कों इनकी जगे’न पै और दूसरी
यै कि अपनों देस कोउ धरमसाला नाँय नें या बात कों अब सरकार और अपुन सबन्ह कों सच्चे
मन सों स्वीकार कर लैनों चैंयें। समझदार लोग’न कों इसारौ पर्याप्त होवै। सही बात
है नें गुरूजी।
कुछ इस तरह से कई लोग रह रहे हैं
यहाँ
कि जैसे घर नहीं हो कर ये धर्मशाला
हो
नवीन सी.
चतुर्वेदी
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