नदी-नालों को समन्दर तो नहीं कह सकते
घुटरू हमारे यहाँ तौ धूमरी धमार है
रही है तेरे यहाँ के का समाचार हैं?
बत्तो कमाल करै तू गली के वा तरफ तू
बैठी है और या तरफ मैं, जाहिर है बरसात परैगी तौ पूरे मुहल्ला में ही परैगी। ऐसौ थोरें ही होवै है
कि मुहल्ला के एक छोर पै बरसा होय और दूसरे पै सूखा।
का बात करै घुटरू, ऐसौ तौ अनेक बेर
देख्यौ है। आधे खेत में घाम और आधे में सीरक, आधे खेत में
बरखा और आधे में सूखा ऐसौ अनेक बार देख्यौ है। भैया बदरा’न की हू अपनी सामर्थ्य
होवै है, जित्ते एरिया के ऊपर छामें बित्ते एरिया पै ही बरसें।
अरे वा री बत्तो क्या बात कह दीनी
तैंनें। आजकल के नेता हु कछू ऐसे ही हैं जित्ते लोग विनकी छत्रछाया में आमें बित्ते’न
कों ही चमकामें। आदमी स्व-केन्द्रित होतौ जाय रह्यौ है।
हाँ घुटरू अब तौ अपना नाम, अपना काम, अपना गाम, अपना परिवार, अपना
कारोबार, अपने सरोकार और केवल अपना उद्धार के ही जादातर दरसन
होमें हैं। राम नाम जपना पराया माल अपना। खुद्द के भीतर सों निकसें तब तौ बाहर की दुनिया में झाँकें। अपनों
पेट भरै तब तौ दूसरे की भूख नजर में आवै। भूखे भजन न होय गुपाला। अपुन ही उपासी तौ
कैसे बनें सन्यासी।
हाँ बत्तो ऐसौ ही है जमानों। वैसें
यै जो बरसात है नें यै बेमौसमी बरसात है। टैम ते पहलें ही आय गयी है। हालाँकि कछु
लोग कह रहे हैं कि पर्यावरण करवट बदल रह्यौ है। या सों प्री मानसून बरसात हु कह्यौ
जाय रह्यौ है।
ठीक है घुटरू तू कह रह्यौ है तौ मान
लेंउ वैसें आजकल के मौसम बतायवे वारे भरोसेमंद नाँय रहे। जा दिन भारी बरसात की
भविष्यवाणी करें वा दिना टपका हु नाँय परै और जा दिना चादर तान कें सोय रहे होंय
वा दिना धूमरी धमार बरस जावै। सवाल करौ तौ
बोलें हमने कहा तो था कि मौसम अचानक करवट बदल सकता है। अरे यै तौ हम हु जानें कि
मौसम काहु के बाप की नाँय सुनें, जब चाहै तब आवै और जब चाहै तभी जावै। जाय चाहै हँसावै और
जाय चाहै रुलावै।
कभी माँगा हुआ देकर कभी जो है उसे
लेकर
मगर हर एक बन्दे को मुसलसल आजमाती है
ये बारिश भी अजब शय है कभी जालिम कभी
मोहसिन
किसी का दिल दुखाती है किसी पर दिल लुटाती
है
नवीन सी.
चतुर्वेदी
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