अब इससे बढ़ के भला क्या कमाल होना है
सही है, हंड्रेड परसेंट सही
है। कछू कमाल जैसौ लगै ही नाँय नें घुटरू। सबकछू पहले सों सेट जैसौ लगै है ठीक
वैसें ही जैसें सावन के बाद भादों आवै, दुपैर के बाद संजा
होवै। एक नयौ-नयौ चैनल वारौ सड़क पै चलते राहगीर’न सों सवाल
कर रह्यौ हुतो। वानें एक दादी अम्मा सों पूछी अम्मा जी चुनाव आने वाले हैं आपको
क्या लगता है अब क्या होगा? वौ अम्मा तपाक
सों बोली लाला रे चुनाव आने वाले हैं मतबल ध्वनि-प्रदूषण बढ़वे
वारौ है। ध्वनि-प्रदूषण ही नाँय वायु-प्रदूषण
भी बढ़वे वारौ है। तमीज और तहजीब कौ भट्टा बैठवे वारौ है। पढ़े-लिखे लोग अँगूठाछाप’न जैसी हरकत करवे वारे हैं। मिलजुल कें बन्द-कोठरी में जो लीला भईं विनके कच्चे-चिट्ठा बीच बजार खुलवे
वारे हैं। हमारी सुख-चैन भरी जिन्दगी की वाट लगवे वारी है।
इतना बहुत है या और कछू बताऊँ? घुटरू बिचारे वा रिपोर्टर नें सपने में हू नाँय
सोची होयगी कि जीते जागते एटम बम्ब सों मुलाकात है सकै!
बत्तो, मैं लिटरली विज्युलाइज कर पाय रह्यौ हों
कि वौ रिपोर्टर कैसें पतरी गली सों निकसौ होयगौ! ऐसौ ही एक किस्सा मैं हू तोय
सुनाओं। रिपोर्टर नें किसान सों पूछी, चाचा बजट आने वाला है,
आपको क्या लगता है, इस बार क्या होगा? किसान
बोलौ बजट आने वाला है तो आने दो, हर बार आता है, यामें कौन सी नयी बात है। वौही बोलंगे इत्ते हजार करोड़ की यै जरूरत है,
वित्ते लाख करोड़ की वौ जरूरत है। इतनों उगाहंगे, इतनों करजा लेमंगे और फलानी-फलानी जायदाद बेचंगे। जनता
के भले की बात करंगे और कोहनी पै गुड़ लगामंगे। कछू अच्छे काम होमंगे हू परन्तु
बस्स वित्ते ही जिनसों वोट मिल सकें। बजट के बाद हर तरफ बजट पै चर्चा होमंगी।
जिन्हें अपने घर के बजट के ब की बकरी कौ हु संज्ञान नाँय नें ऐसे-ऐसे धुरन्धर बजट के पक्ष और विपक्ष में लेक्चर झारंगे।
सच्ची घुटरू दसा ऐसी है गयी है कि का
कहें और कौन सों कहें? कल एक नजूमी मतबल ज्योतिसी कौ फोन आयौ, कह रह्यौ हुतो कि हम
आपका भविष्य बता सकते हैं। मैनें वासों कही लाला रे जनता सों बड़ौ जोस्सी कौन? और दारी
के कों यै शेर सुनाय मारौ
हम इस जहान के सबसे बड़े नजूमी हैं
हमें पता है हमें ही हलाल होना है
नवीन सी.
चतुर्वेदी
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