मंदी चालू आहे – ब्रजभाषा व्यंग्य

 घुटरू एक बात तौ बताय यै जो लोग कहते रहें कि भौत महँगाई है, भौत मंदी है तौ सच्चऊँ ऐसौ है या लोग बस बहाने ही ढूँढते रहें?

 बत्तो, तैंनें मंदी की जो बात पूछी है वाकौ उत्तर बाद में देंउ अभी मोय एक बड़ौ ही दिलचस्प किस्सा याद आयौ है, तू कहै तौ वौ सुनाओं?

 

ठीक है घुटरू, सुनाय!

 

बत्तो, जैसें हिन्दीपट्टी में पहलें ‘ये जो है जिन्दगी’, ‘देख भाई देख’ और हाल के दिन’न में ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ जैसे धारावाहिक’न कौ जलवा रह्यौ वैसें ही  मराठीपट्टी में हास्य-मालिका ‘महाराष्ट्राची हास्यजत्रा’! नें धूम मचाय रखी है। आजकल ये का दिखाय रहे हैं पतौ नाँय मगर इननें सैकड़’न स्किडस बनाय कें लोग’न के दिल’न पै राज कियौ है।

 

घुटरू वौ मंदी वारौ किस्सा बाँच!

 

हाँ बत्तो, नैंक धीरज धर, सुनाय रयौ हों। एक एपिसोड की कहानी सुन! वा एपिसोड में एक पुरुष पात्र है ‘प्रभाकर मोरे’और वाकी पत्नी कौ नाम है ‘मंदी’। मोरे बजार सों घर लौटै और आते ही दहाड़ कें बोलै मंदी, यै मैं का सुन रयौ हों? लोग कह रहे हैं ‘मंदी चालू आहे’! वाकी पत्नी सुन कें अवाक रह जावै! कहै कि नाँय मैं ऐसी नाँय नों, मैं पवित्र हों। वौ आगें बोलै अरे मंदी मैंनें अपने कान’न सों सुनी है, दुकानदार अपने ग्राहक’न सों कह रहे हैं ‘सहाब मंदी चालू आहे!’ वाकी घरवारी फिर कहै मैं ऐसी नाँय नों, मेरौ विश्वास करौ। मोरे अखबार दिखाय कें बोलै देख यामें का लिख रयौ है मंदी के कारण लोग’न के मन विचलित है गये हैं! कछू’न नें आत्म हत्या कर लीनी है आदि-आदि, अब तोय कहाँ तक बताओं बत्तो! खुद वा एपिसोड कों देखियो, हँसते-हँसते लोटपोट है जायगी!

 

ठीक है घुटरू मैं जरूर देखोंगी मगर अब मेरी बात कौ जवाब तौ दै, मंदी सच्चऊँ है या नाँय?

 

बत्तो, तेरी पुरानी आदत है जो जानें वौ हु मो सों सुननों चाहै! सुन, मंदी की मार सों जो बेहाल हैं ऐसे लोग  सियापौ करते भए नाँय मिलंगे। ऐसे लोग तौ रातदिन बस जा भँवर में फँस गये हैं वासों बाहर निकसवे की कोसिस करते भए ही मिलंगे। अधिकतर मंदी के नाम सों पिट्टन तौ वेही मचामें हैं जो हर साल दो साल में महँगे-महँगे फोन बदल लेमें हैं, ऑनलाइन पिज्जा बर्गर मँगाते रहें, ब्याउ-बरात’न में पानी की तरें पैसा बहाते रहें, समझी, याही मारें तौ कहें कि

 

द्वारें-द्वारें फटफटी, गली-गली पिस्तौल

काहे की मंदी प्रभू, भरे पड़े हैं मौल

 

नवीन सी चतुर्वेदी

No comments:

Post a Comment