चौबीस घंटा मिकी माउस – ब्रजभाषा व्यंग्य

 घुटरू भैया, बड़े दिनन बाद दरसन दिये! कहाँ जाय मरौ हो मरे?

अरे कहूँ नाँय बत्तो, और कहाँ जामंगो? चुनाव है रहे हुते, सो नैंक मोदी जी के संग बिजी हुतो! का कही, तू और मोदी जी!

और नाँय तौ का? तू जो मन की बात सुनें है नें, मैं ही तौ लिखों हों!

अरे जा झूठे, और कोउ नाँय मिलौ जो सबेरें-सबेरें मोय पकाय रह्यौ है! मोदी जी कौ दिमाग सुपर कम्प्यूटर कौ बाप है, विनें खुद्द पतौ नाँय रहै कि अगले पल ऊँट कौन सी करोंट बैठैगौ! तू खाक समझैगौ! छोड़, और बताय का हाल चाल हैं?

का बताओं बत्तो, आग तौ बुझ गयी, मगर धुआं छँटवे कौ नाम नाँय लै रह्यौ! पब्लिक के नसीब में सुख-चैन कहाँ! जबसों चुनाव-परिणाम आये हैं, दो फिल्मी-गाने भौत याद आय रहे हैं?

कौन-कौन से नैंक मैं हू तौ सुनों!

पहलौ गानों, नाइंटीन सेवेंटी फोर की फिल्म ‘रेशम की डोरी, शैलेन्द्र, शंकर-जयकिशन और सुमन कल्याणपुर की टीम, गीत के बोल “बहना ने भाई की कलाई से प्यार बाँधा है, रेशम की डोरी से संसार बाँधा है”; यै गानों भौत याद आयौ! कैसौ जमानों हुतो, कैसे लोग हुते, और कैसी पवित्र भावना! अब तौ ऐसौ जमानों है कि मंच पै पब्लिक के सामनें राखी बँधवाउ और बाद में उतार फेंकौ!

हाँ घुटरू, तैनें पुराने जखम हरे कर दिये! अच्छे लोग तौ जैसें खोय ही गये हैं! खैर, दूसरे गाने के बारे में बताय!

बत्तो, दूसरौ गीत. नाइंटीन सिक्सटी फोर की फिल्म ‘धरती कहे पुकार के, मजरूह सुल्तानपुरी, लक्ष्मीकान्त-प्यारेलाल और मुकेश-लता की टीम, गीत के बोल “हम-तुम चोरी से बँधे इक डोरी से, जइयो कहाँ ऐ हुजूर”. मतलब जो एकबार बन्धन में बँध गये सो बँध गये, छूटवे कौ कॉलम ही नाँय! अब की तरें नाँय कि आज वेडिंग पार्टी, कल्ल ब्रेकअप पार्टी! आज या दल में, कल्ल वा दल में! भयंकर दलदल मचाय रखी है! सब समय की माया है, कहीं धूप कहीं छाया है.

सही कह रह्यौ है घुटरू. अब मेरी सुन. याद है अपुन बचपन में एक कार्टून देखौ करते, टॉम एंड जेरी वारौ मिकी-माउस. मोय चिन्ता रहती, हाय बड़े हैवे के बाद यै कार्टून देखवे कौ सुक्ख छूट जायगौ! मगर एक बात कहनी परैगी घुटरू, अपने नेता बड़े ही दयालु हैं, विननें मोय नैंकू निरास नाँय कियौ. अब तौ टॉम एंड जेरी चौबीसौ घंटा दरसन देते रहें.

 यत्र-तत्र-सर्वत्र मात्र ये ही झंझट है

चारों ओर विकल्प-हीनता का संकट है

 नवीन सी. चतुर्वेदी

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