एक अप्रैल को सबेरें सबेरें मोबाइल पै मैसेज आयौ
कि लॉकडाउन लगवे वारौ है। मैसेज खोल कें देखौ तौ अन्दर लाल लाल अक्षर’न में लिखौ
भयौ हुतो ‘अप्रैल फूल’। पढ़ कें चेहरा पै स्माइल तैर गयी और बचपन की अनेक’न कहानी
याद आय गयीं। एक कहानी शेयर करों।
आप कों हु याद होयगौ
कि चार छह जने मिल कें, बड़ी
ही हुशियारी दिखाते भए, पत्तर के बड्डे से दौना में, गैया के गोबर कौ बरा बनाय कें, वा पै ढेर सारौ दही बिछाय
कें, ऊपर सों नोंन मिर्च भुनों भयौ जीरौ बुरक कें और लकड़िया की
चिम्मच लगाय कें, अपने काहु परम प्रेमी कों खायवे कों देते
और जैसें ही वौ दही सने गोबर कों दाँत’न सों चबाते ही थू थू करवे लगतो, सब जने अप्रैल फूल अप्रैल फूल कह कें तारी बजायवे लगते । हँस हँस कें लोट
पोट हैवे लगते। थोरी देर हाथ पाम पटकवे के बाद वौ गोबर खौआ हू धींगा मस्ती में
सामिल है जातो और फिर सब जने मिल कें अगले सिकार की खोज सुरू कर देते। अद्भुत समय
हुतो वौ। लोग बड़ी बड़ी मजाक’न कों खुस है कें सह लेते अब तौ छोटी मोटी मजाक हू
विश्व युद्ध कौ कारण बन जावै है।
वैसें जब सों यै
दुनिया है, जब सों इन्सान है, मस्ती तब सों या भूतल पै पंच तत्व की भाँति अस्तित्व में है; और जब तक यह
नश्वर संसार है, यह समाज है और हमारे तुम्हारे जैसे लोग हैं, तब तक हास परिहास विद्यमान रहैगौ। हाँ, कछू लोग हास
परिहास कों मूर्खता कौ पर्यायवाची हू मान लेमें हैं। अब अपने अंतरराष्ट्रीय पप्पू
जी कों ही देख लो! नाँय समझे? अरे भैया अन्तर्राष्ट्रीय पप्पू यानी अपने ट्रम्प
बाबू। पप्पूगिरी में नैंक हू पीछें पर रहे
होंय तौ बताउ! आज की तारीख में है कोऊ विनके जैसौ बीर बहादुर!
मोय तौ ट्रम्प सों
जादा विन लोग’न की बुद्धि पै तरस आवै है,
जिननें दुनिया के चौधरी की कुर्सी पै या जैसे ऊद बिलाऊ कों बिठार दियौ है! का इतने
निर्विकल्प है गये अमरीका वासी? याके अलावा और कोउ मिल्यौ ही नाँय? दुनिया कों
बेवकूफ समझवे कौ आलम यै है कि ट्रम्प बाबू भर दुपैरी में दहकते सूरज के नीचें खड़े
है कें अपनी आँखि’न पै हथेरी रख कें कह रहे हैं कि सूर्यास्त हो गया। अब ट्रम्प
बाबू कों कौन समझावै कि
मान देकर, मान जाना ही प्रजा का है स्वभाव
हेतु होगा मौन का, भयभीत मत समझो इसे
नवीन सी. चतुर्वेदी
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