ब्रजभाषा व्यंग्य – मूसे भगाऔ द्वीप बचाऔ

घुटरूमल जी अखबार पढवे के सौकीन हैं। काऊ काऊ दिन तौ चार चार अखबार’न कों हु पढ़ मारें। पढनों का जी बस हैडिंग पै नजर डारें और फिर यै सेर हू सुनाय मारें कि “ बढ़ते बढ़ते बढ़ते बढ़ते इतनी बढ़ गई है रफ्तार; पाँच मिनट में पढ़ लेते हैं दस पन्नों वाला अखबार”। हाँ कोउ अलग सौ हैडिंग दीखै तौ विस्तार सों न केवल पढ़ें बल्कि वा की चर्चा हमसों हू करें।

काऊ अखबार में पढ़ आये कि बेरिंग सागर में स्थित अलास्का कौ सेंट पॉल आइलैण्ड यानि द्वीप जून 2024 सों हाई अलर्ट पै है। हमें लगौ कि आतंकवादी घुस गये होंगे या कोउ भीषण प्राकृतिक आपदा आय गयी होयगी। बाद में विन नें बताई कि भैया न तौ आतंकवादी घुसे हैं और न ही कोउ भीषण प्राकृतिक आपदा आयी है। वहाँ तौ एक मूसौ यानि गणपति कौ वाहन चूहा घुस गयौ है। हमनें सोची एक मूसे के लिएं इतनी हाय तौबा?

फिर हम नें गूगल पै सर्च कियौ तौ पतौ चलौ कि यै द्वीप दुर्लभ समुद्री पक्षी और फर सील जैसे वन्य जीव’न कौ ठौर ठिकानों है। जैसें कहें नें कि एक मच्छर आदमी को नपुंसक बना देता है वैसें ही यहाँ के लोग’न कौ माननों है कि एक मूसौ द्वीप की बैण्ड बजायवे कों पर्याप्त है।

हमें लगै कि यै एकदम सही बात है। घर बनावै वा सों पहलें ही बिमारी कों उखाड़ फेंकवे में समझदारी है। बाद में मूड़ माथे कूटवे सों का फायदा?

अगर हमारे अखण्ड भारत देश पै सबसों पहलौ आक्रमण करवे वारे पहले आक्रान्ता कों उखाड़ फेंकवे के लिएं हम सब एकजुट है जाते तौ सैंकड़’न साल की गुलामी क्यों झेलनी परती? अगर हम लोग ईस्ट इण्डिया कम्पनी की पहली चाल कों ही  समझ जाते तौ अंग्रेजो भारत छोड़ो नारौ लगायवे की नौबत क्यों आती? अगर पहले भ्रष्टाचारी नेता कों ही कुर्सी सों खेंच कें नीचें उतार कें वा कौ झलूस निकार दियौ जातो तौ आज हम भ्रष्टाचार की दलदल में फँसे न होते!

अभू भौत जादा नुकसान नाँय भयौ है। पुरानी बिमारी तौ जो लग गयीं सो लग गयीं, विनके उपचार जब होमंगे तब होमंगे; कम सों कम हम नयी बिमारी सों तौ बच ही सकें। सोश्यल लाइफ के नाम पै अपुन सबन्ह की प्राइवेसी कौ जो चीर हरण है रयौ है नें आउ अपुन सब मिल कें या कौ कछू इलाज करें ताकि कल यै न कहनों परै कि अब पछताऐं होत का जब चिड़िया चुग गई खेत। जय राम जी की।

 

नवीन सी. चतुर्वेदी

No comments:

Post a Comment