ब्रजभाषा व्यंग्य – पूछरी के लौठा

 कछू दिन पहलें एक खबर आयी कि सरकारी चपरासी के पास करोड़’न की सम्पत्ति मिली। जभू ऐसी चर्चा चलें तौ  सोसायटी वारे परिचर्चा आयोजित करें। अबकौ विषय हुतो ‘भ्रष्टाचार उन्मूलन’। वक्ता’न में घुटरूमल जी कों हु बुलायौ गयौ। घुटरूमल जी के वक्तव्य के मेन-मेन पॉइण्ट’न कौ आप हू आनन्द लेउ।

 

भाइयो-बहनो हमारे ब्रज में जो गोवर्धन की परकम्मा लगै उसमें पूछरी का लौठा आता है। भया यूँ कि कृष्ण भगवान गोपियों से माखन लूट लेते थे। गोपियाँ बचने के लिए हर बार नया रस्ता ढूँढ लेती थीं। एक बार ऐसा हुआ कि भौत दिन हो गये गोपियाँ हत्थे चढ़ें ही नहीं। तो कृष्ण भगवान ने जगें-जगें ग्वाल-बाल पहरे पै लगाय दिये। तौ हू कछु पतौ नहीं चलौ। नित्त माखन खाय कें जो ग्वालबाल हट्टे-कट्टे है रहे थे बे सब कमजोर होन लगे। लेकिन एक ज्वान पहले सों हू जादा तगड़ौ लौठा जैसौ हैवे लगौ। वा पै डाउट आयौ, चैक करौ तौ सिगरी पोल खुल गयी। पूछरी गाम में वाकी पहरेदारी हुती। पट्ठा रिश्वत में गोपि’न सों गुपचुप माखन खाय लेय और मस्त पर्यौ रहै। कोउ पूछै तौ कह देय - ऑल इज वैल। याही सों वाकौ नाम पूछरी कौ लौठा पर गयौ। आज भी लोग गामें अरी कैसौ पर्यौ सलौठा, यै पूछरी कौ लौठा।

 

द्वापर में तौ केवल एक ही पूछरी कौ लौठा हुतो परन्तु या कलियुग में तौ ऐसी कोउ जगें नाँय बची जहाँ पूछरी के लौठा खूँटा गाड़ें बैठे न होंय। घर, बजार, दफ्तर, सभा-सोसायटी जगें-जगें पसरे परे हैं। आँख, कान, म्हों सब होमें इनके पास किन्तु मजाल है जो कभू इनकौ उपयोग करते होंय। केवल अपनों स्वारथ सिद्ध करें और परे रहें। कोउ पूछै तौ रटौ-रटायौ जवाब - ऑल इज वैल। हर्षद मेहता काण्ड होय या तेलगी कौ स्टैम्प घुटालौ, जितने हू घुटाले भये सब के सब इन पूछरी के लौठा’न की कृपा सों ही भये।

 

इनके ब-कायदा अपॉइंटमेंट होमें, प्रमोसन होमें, पसन्द की जगे’न पै ट्रान्सफर होमें, प्रोटेक्सन हू मिलै। आगें, पीछें, ऊपर, नीचें, दाएं, बाएं यानि एक लौठा के हर तरफ लौठा ही लौठा। परस्पर सहयोग सों मस्त सिस्टम चलतौ रहै। जो इनकी सिकायत करै उलटी वाई की क्लास लग जावै।  

 

किन्तु एक बात है साब, ईमानदारी देखनी होय तौ इनके हिसाब-किताब देखौ। न खाता न बही मगर हिसाब एकदम सही। सबकों अपनों हिस्सा बरब्बर मिलतौ रहै। मगर यै हू है कि जैसें ही काऊ की नीयत खराब होय, वाकी उलटी गिनती सिरू है जावै। मतबल बेईमानी कौ कारोबार पूरी ईमानदारी सों चलै। बाकी तौ आप सब समझदार हो ही। जय राम जी की।

 

नवीन सी. चतुर्वेदी

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