जैसे हम वैसे हमारे नेता – ब्रजभाषा व्यंग्य

 बड़े छल्ले-पट्टे करवामन लगौ है घुटरू! हेयरडाई, फेसियल और जानें कहा-कहा करवामन लगौ है!

 बत्तो, कहवे लायक तौ तू हू नाँय नें!  मर्द तौ केवल डाई और फेसियल ही करवामें, लुगैया तौ नेल-पॉलिश सों बढ़ कें नेल-आर्ट पै आय गयी हैं! काहू जमाने में जितने में अनाज भर जाउ करतो, वितने कौ तौ अब बूटीपार्लर’न कौ बजट होमन लगौ है!  फैसन न भयी, ऑक्सीजन है गयी!

 

देख घुटरू, जादा मर्द औरत वारी पॉलिटिक्स तौ करियो मत, नहीं तौ महिला मोर्चा वारी’न कों तेरे घर कौ पतौ बताय दोंगी! फिर भुगतियो अपने कर्म’न के फल!

 

अरी भेंन बत्तो, तू बात-बात में सेंटी क्यों है जावै है? अपुन कोउ नेता हैं? और यै जगें कोउ संसद-भवन है? जो नैंक-नैंक सी बात’न पै जूतमपजार करवे लगें? एक दूसरे के कपड़ा फारवे लगें! मर्यादा भूल जामें! भूल मत, अपने देस में जूतमपजार की छूट केवल नेता’न कों ही मिली भयी है! मेरे तेरे जैसे’न कों तौ एक मिनट में अन्दर कर दियौ जावै है!

 

ऐसौ क्यों घुटरू? कानून तौ सबके लिएं बराबर होनों चैंयें!

 

बत्तो, यों समझ, दुनिया में हमेसा सों दो तरह के कानून चलते रहे हैं! पहलौ कानून तौ वौ जाते कि कानून कह्यौ जावै और दूसरौ कानून वौ जो यह तय करै कि कानून कौ कब, कहाँ, कैसें, कौन पै और का तरें इस्तेमाल कियौ जानों है!

 

घुटरू यै तौ दोगलौपन भयौ नें?

 

हाँ बत्तो, यै दोगलौपन ही है और तू दोगलेपन की का बात कर रही है? दोगलेपन सों अछूते तौ अपुन हू नाँय नें! अपुन कितनी हू नैतिकता की बात कर लेंय मगर जैसें ही कहूँ कोऊ काम अटकै, सबरी नैतिकता खूँटा पै टँग जावै! येन केन प्रकारेण बस अपनों काम करवायवे के लिएं अपुन सब कछू करवे कों तैयार है जामें! याद कर, जब ट्रेन-टिकट कन्फर्म नाँय होवै तौ अपुन टीटी कों घूस दैवे कों तैयार है जामें हैं कि नाँय! वौ हू हाथ जोर कें! कथनी और करनी के या अन्तर कों ही तौ दोगलौपन कह्यौ जावै है! भेंन बत्तो, याही मारें कहें कि दूसरे’न पै टिप्पणी करवे की बजाय खुद के गिरेबान में झाँकनों चैंयें! बात कड़वी जरूर है मगर है सोलह आना खरी कि “यथा राजा तथा प्रजा” तौ केवल कागजी बात है! ब्यौहार में तौ “यथा प्रजा तथा राजा” ही दिखाई परै है! रोमन-पिट्टन क्यों मचानों? जैसे अपुन हैं, वैसे ही अपने नेता हैं!

 

हर तरफ वादाखिलाफी है तो है, क्या कीजिये?

दोगलों पर दोगले ही राज करते हैं हुजूर  

 

नवीन सी. चतुर्वेदी

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