घुटरूमल जी गुणनिधान हैं। इनमें एक नाँय अनेक’न विशेषता हैं। आप कोउ भी विषय छेड़ देउ, ये धाराप्रवाह बोल सकें। अब यै अलग बात है कि आप आचार-विचार की बात करौ और ये अचार-पापर पै बोलन लगें। आप धरम की बात करौ और ये धर्मेन्द्र पै बोलन लगें। आप के होंठ’न पै सूत आवै वा सों पहलें ही ये सूँतवे पै बोलन लगें। कछू भी है जाय मगर ये चुप्प नाँय रहंगे। बोलंगे जरूर।
जैसौ
कि आप सब जानों ही हौ कि दिवारी सों पहलें घर-दफ्तर’न
की साफ-सफाई सुरू है जावै। घुटरूमल जी के
एरिया के नगरसेवक नें जागरूकता बढायवे के लिएं साफ-सफाई
विषय पै एक भाषण प्रतियोगिता रखी। ये पॉलिटिसियन हु बड़े सियाने होमें,
मौकौ
मिलते ही लोग’न कों बुलानों और घुट्टी पिबानों। पार्टी कोऊ भी होय घुट्टी पिबायवे
में कोउ काऊ सों कम नाँय। वक्ता’न में घुटरूमल जी कौ हु नाम हुतो। नेता तौ पब्लिक
कों घुट्टी पिबानों चाह रहे हुते मगर घुटरूमल जी नें उलटे बाँस बरेली पहुँचाय
दिये। जा आदमी कों विषय पै बोलनों होय वौ सोच-विचार
कें बोलै, इन्हें तौ अल्ले की मेरी पल्ले
मारवे ते मतलब। अपनों नम्बर आयवे पै पहलें गलौ खँखारौ, माइक
हिलायौ-डुलायौ फिर गड्डमड्ड हिन्दी-ब्रजभाषा
में बोले।
भाइयो-बहनो!
बिरकुल भी कनफूज मत होना, साफ और
सफाई एक नहीं दो अलग-अलग सब्द हैं। साफ तो बो
है जो साफ-साफ दिखाई परै,
साफ-साफ
सुनाई परै, साफ-साफ
समझ आवै और सफाई बो है जो जनम-जनम से हमारी-तुमारी
जेबों की हो रही है। याद करौ नवाबों के जजिया और अँगरेजों के लगान ने किनके जेबों
की सफाई करी थी? जमींदारों और सूदखोरों ने भी कोरे कागज’न पै अँगूठा किनसे लगवाये
थे? पटवारियों और अफसरों ने भी किनके खेत-खलिहानों
पर डाके डारे थे? आप सब कों याद न होय तौ बताय दूँ रमायन में साफ-साफ
लिख्या भया है कि दण्डकवन में जो खर-दूसन नामक
राक्षस हुते बिनने भी रिसी-मुनी
यानी सीधे-सादे लोग’न की ही सफाई करी थी; और
तब के UNO प्रेसिडेंट यानी लंकापति रावण इस
काम के लिएं बिनका न केबल पूरा सहयोग करते थे बल्कि नोबल-पुरस्कार
भी देते थे। तौ भैया भौत साफ-साफ
सब्दों में आप समझ लो कि साफ तो बो है जो अभी-अभी
हमनें आपकों बताया है और सफाई बो है जो जनम-जनम
से हमारी-तुमारी जेबों की होती रही है,
आज
भी हो रही है और आगे भी होती रहेगी। जय राम जी की।
नवीन
सी. चतुर्वेदी
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