घुटरूमल जी के भतीजे की बरात हुती हमनें पूछी और साब का-का माल रहे? बोले पूछौ ही मत 10 तरें के रोटी, परामठे, पूरी; पन्द्रह तरें के साग, बीस तरें की मिठाई और अनेक’न तरें के रायते। एक होय तौ नाम गिनामें बूँदी कौ, चुकन्दर कौ, गाजर कौ, सेव-अनार कौ, पापर, लौकी, ककड़ी, मूरी, आमी, गोभी, भिण्डी और हू न जानें का-का, पूछौ ही मत। लोग मिठाई’न की कम और रायते’न की जादा चर्चा कर रहे हुते और गुरूजी कछू लोग तौ रायता-पुराण हू बाँच रहे हुते।
एक फॉरेन रिटर्न टाइप विदुषी
बोलीं कि ट्रम्प नें टैरिफ नाम कौ जो रायतौ बिखेरवौ शुरू कियौ है नें यै बड़े-बड़े देस’न की धोती न खुलवाय देय तौ कहियो। अभी प्रत्यक्ष में तौ यै एक ही
दिख रह्यौ है परन्तु या के पीछें बीस’न तरें के दूसरे रायते हू क्यू में हैं। एक-एक कर कें सबरे बिखेरंगे।
एक मूछ’न वारे अंकल बोले कि पुतिन
और जेलेन्सकी वारे रायते के सिमटवे के दिन नजीक आय रहे हैं। तभी एक दूसरे मूछ’न वारे अंकल बोले सिमटवे के
नाँय नयी तरें सों बिखरवे के दिन आय रहे हैं। मनुष्य वैरायटी’न कौ प्रेमी है, वाय फजीते’न में हू वैरायटी चैंयें मतबल एक नाँय तरें तरें के रायते।
हमनें कही घुटरूमल जी इन्हें
छोड़ौ हम तुमें शॉर्ट में इन सबसों बड़े रायते की कथा सुनामें। अब तक कौ सब ते बड़ौ
रायतौ तौ आदम और हव्वा नें फैलायौ और ऐसौ फैलायौ कि समेटे’न नाँय सिमट रह्यौ। जो
हू या रायते कों समेटवे जावै अपने दूसरे रायते और बिखेर आवै। चर्चा छोड़ौ और
रायते’न कौ स्वाद लेउ, या में ही समझदारी है ……..
नवीन सी. चतुर्वेदी
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