ब्रजभाषा व्यंग्य – अथ रायता पुराण

 घुटरूमल जी के भतीजे की बरात हुती हमनें पूछी और साब का-का माल रहे? बोले पूछौ ही मत 10 तरें के रोटी, परामठे, पूरी; पन्द्रह तरें के साग, बीस तरें की मिठाई और अनेक’न तरें के रायते। एक होय तौ नाम गिनामें बूँदी कौ, चुकन्दर कौ, गाजर कौ, सेव-अनार कौ, पापर, लौकी, ककड़ी, मूरी, आमी, गोभी, भिण्डी और हू न जानें का-का, पूछौ ही मत। लोग मिठाई’न की कम और रायते’न की जादा चर्चा कर रहे हुते और गुरूजी कछू लोग तौ रायता-पुराण हू बाँच रहे हुते।

  एक दद्दा जी बोले कि विनकी ज्वानी के दिन’न में भारत में अन्तरात्मा की अवाज नाम कौ एक ऐसौ रायतौ फैलौ हुतो कि पूछौ ही मत। रातों-रात कानों-कान खबर न होंन दीनी और तीन-तेरह करवाय दिये। लोग आज तक नाँय समझ पाये कि नैतिकता और अनैतिकता के बीच वौ कैसौ भेद हुतो? वा अन्तरात्मा की अवाज के रायते की रेसिपी पै अब तक रिसर्च चल रही हैं। नये-नये दृष्टिकोण’न सों नयी-नयी समीक्षा आय रही हैं। नये-नये प्रयोग है रहे हैं। अब जबकि नैतिकता और अनैतिकता के बीच में अन्तरात्मा की अवाज आय गयी तौ यै लीगल तौ मान ही लियौ गयौ है। अन्तरात्मा पै शैतान हावी है जाय तौ हू वा कों नैतिकता मान लैवे के अभ्यस्त है चुके हैं हम।

 

एक फॉरेन रिटर्न टाइप विदुषी बोलीं कि ट्रम्प नें टैरिफ नाम कौ जो रायतौ बिखेरवौ शुरू कियौ है नें यै बड़े-बड़े देस’न की धोती न खुलवाय देय तौ कहियो। अभी प्रत्यक्ष में तौ यै एक ही दिख रह्यौ है परन्तु या के पीछें बीस’न तरें के दूसरे रायते हू क्यू में हैं। एक-एक कर कें सबरे बिखेरंगे।

 

एक मूछ’न वारे अंकल बोले कि पुतिन और जेलेन्सकी वारे रायते के सिमटवे के दिन नजीक आय रहे हैं।  तभी एक दूसरे मूछ’न वारे अंकल बोले सिमटवे के नाँय नयी तरें सों बिखरवे के दिन आय रहे हैं। मनुष्य वैरायटी’न कौ प्रेमी है, वाय फजीते’न में हू वैरायटी चैंयें मतबल एक नाँय तरें तरें के रायते।

 

हमनें कही घुटरूमल जी इन्हें छोड़ौ हम तुमें शॉर्ट में इन सबसों बड़े रायते की कथा सुनामें। अब तक कौ सब ते बड़ौ रायतौ तौ आदम और हव्वा नें फैलायौ और ऐसौ फैलायौ कि समेटे’न नाँय सिमट रह्यौ। जो हू या रायते कों समेटवे जावै अपने दूसरे रायते और बिखेर आवै। चर्चा छोड़ौ और रायते’न कौ स्वाद लेउ, या में ही समझदारी है ……..

 

नवीन सी. चतुर्वेदी

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