हमनें सुनी कि पूना में गणेश
उत्सव के दौरान दारू पीवे पै यै कहते भये बन्दिस लगाई गयी कि उत्सव मनाने वाले
दारू पी कर माहौल खराब करते हैं. धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं आदि आदि इत्यादि.
नशे को ‘ना’ – ब्रजभाषा व्यंग्य
“अरे
सरमा जी का कर रहे हौ? भूल गये का आज अपुन
कों नसा उन्मूलन कार्यक्रम में भासन दैवे जानों है.” बरमा जी म्हों अकास की तरफ कर
कें गुटखा की पीक कों कपड़ा’न के ऊपर गिरवे सों बचाते भए होंउ होंउ होंउ
टाइप भासा में बोले. बरमा जी नें भलें ही कितनों हू पीक टपकवे सों बचायवे कौ
प्रयास कियौ तौ हू थोरी सी निसानी तौ अधर’न सों खिसक कें, ठुड्डी
की नोंक सों जम्प लै कें कमीज पै आय ही गिरी.
ऐसी डीपी लगाई लैला ने – ब्रजभाषा व्यंग्य
वैसें हम हैं तौ बिसुद्ध फेसबुकिया परन्तु आप हमें
अफीमची की उपाधि सों नवाज सकौ। का बतामें साब रोज सवेरें उठ कें “कराग्रे वसते
लक्ष्मी“ कौ पाठ करवे वारे हम अब उठते ही मोबाइल ढूँढ कें फेसबुक चैक करवे लगे
हैं।
सेंचुरी और आभार ज्ञापन – ब्रजभाषा व्यंग्य
लो साब देखते ही देखते सेंचुरी लग ही गयी। सेंचुरी
मतबल हंड्रेड मतबल सैंकड़ा मतबल शतक। हम हू का बिना बात के कागद कारे करें जाय रहे
हैं! कागद कारे या तौ एक जमाने में जनसत्ता वारे प्रभास जोसी जी करौ करते या भैया सरकारी
लोग करौ करें हैं।
घुटरू नें सीखी मराठी - ब्रजभाषा व्यंग्य
घुटरू मैंनें सुनी तू आजकल मराठी सीख रह्यौ है, तू रिक्सा तौ चलावै नाँय नें, फिर मराठी क्यों सीख रह्यौ है? काहू मराठी सेठ की नौकरी पकरनी है या काहू
मराठी छम्मक छल्लो सों तेरे नैना लड़ गये हैं, बात का है,
नैंक बताय तौ सही घुटरू?
दिलों में सिर्फ तिरंगा ही चाहिए साहब - ब्रजभाषा व्यंग्य
भलें ही हमें यै याद न होय कि कल रात ब्यारू में कहा
खायौ हुतो? परसों हमनें का पहनों हुतो? पिछली बार खुल कें हम कब हँसे हुते? सरकार कौ
कौन सौ काम चोखौ लग्यौ हुतो? आदि आदि इत्यादि;
ब्रजभाषा व्यंग्य – न इल्लंग के भले हैं न उल्लंग के
रील वारे हू कैसी कैसी रील
बनाय मारें. अब तौ सहर वारे हू ऐसी रील’न कों देख
कें चौंकें नाँय नें. एकदम नॉर्मल सौ लगन लग्यौ है सब कछ. वैसें रील होंय या
राजनीती के चोचले, दौनों’न की गत एक जैसी है.
मछलियों के हक में बगुलों की जमात – ब्रजभाषा व्यंग्य
घुटरू यै बगुलाभगत वारी कथा का है? या कों नैंक उदाहरण
सहित समझाय सकै का?
पापी पेट नाँय जिब्बो रानी है – ब्रजभाषा व्यंग्य
यामें चामर का खसखस भर हू संसय नाँय नें कि हास-परिहास सर्वश्रेष्ठ औषधि है। आप सोच रहे होउगे कि हमनें खसखस और चामर कौ जिकर क्यों करौ है?
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