नशे को ‘ना’ – ब्रजभाषा व्यंग्य

“अरे सरमा जी  का कर रहे हौ? भूल गये का आज अपुन कों नसा उन्मूलन कार्यक्रम में भासन दैवे जानों है.” बरमा जी म्हों अकास की तरफ कर कें गुटखा की पीक कों कपड़ा’न के ऊपर गिरवे सों बचाते भए होंउ होंउ होंउ टाइप भासा में बोले. बरमा जी नें भलें ही कितनों हू पीक टपकवे सों बचायवे कौ प्रयास कियौ तौ हू थोरी सी निसानी तौ अधर’न सों खिसक कें, ठुड्डी की नोंक सों जम्प लै कें कमीज पै आय ही गिरी. 

हाथ में पकरी भयी सिगरेट सों आखिरी सुट्टा मारते भए सरमा जी बोले “हजार बार कही है कि जा गुटखा कों छोड़ देउ छोड़ देउ, मगर आप सुनों तब नें?”

 

बचे भए म्हों के गुटखा कों एक कोने में थूकते भए बरमा जी बोले “अच्छा मो कों तौ गुटखा नुकसान करैगौ और यै सिगरेट, यै फायदा की चीज है का, आप कों फायदा कर रही है का यै”

 

सरमा और बरमा दो ऐसे दोस्त जो दौनों एक दुसरे कों नसा न करवे की सलाह देते रहें किन्तु मजाल है कि एक से नें हू नसा सों तौबा करी होय. इनकी दलील हू बड़ी दिलचस्प होमें हैं. सरमा जी कहें कि गुटखा खायवे वारे केंसर में तड़प तड़प कें दम तोरें हैं तौ बरमा जी कहें कि सिगरेट के सुट्टा लगायवे बारे अपने संग संग दुसरे लोग’न के फेंफड़ा’न में हू जहर घोरते रहें. मतलब हम बुरे तो हैं मगर आप से कम. इनकी ऐसी बहस चलती ही रहें. आज इन दौनों’न कों एक सरकारी कार्यालय में ‘नशा उन्मूलन’ कार्यक्रम में भासन दैवे जानों है. जाहिर सी बात है कि वहाँ न बरमा जी गुटखा खाय पामंगे न सरमा जी सुट्टा लगाय पामंगे, सो दौनों वहाँ जायवे सों पहलें अपने अपने कोटा पूरे करवे में लगे भये हैं.

 

अपने अपने कोटा पूरे करवे के बाद दौनों’न नें रिक्सा पकरौ और चल दिये वा ऑफिस की तरफ. पहलें ही लेट हुते सो भाजे भाजे सीधे अधिकारी के पास पहोंचे. विनें देखते ही अधिकारी महोदय हथेरी पै खैनी रगड़ते भए बोले “आउ साब आप कौ ही इन्तजार है रह्यौ हुतो, चलौ अब नसा उन्मूलन कार्यक्रम सुरु करें”.

 

स्वयं विषाद के अनुभव जिन्हें कमाने होंय

सिखामें का विनें, धक्का ही जिनकों खाने होंय

 

नवीन सी चतुर्वेदी

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