घुटरू मैंनें सुनी तू आजकल मराठी सीख रह्यौ है, तू रिक्सा तौ चलावै नाँय नें, फिर मराठी क्यों सीख रह्यौ है? काहू मराठी सेठ की नौकरी पकरनी है या काहू
मराठी छम्मक छल्लो सों तेरे नैना लड़ गये हैं, बात का है,
नैंक बताय तौ सही घुटरू?
बत्तो तू भी है नें, बात कौ बतंगड़ बनायवे में नम्बर वन है! तोय तौ काहू न्यूज चैनल
में जॉब पकर लैनों हो, विनकौ चैनल टीआरपी के सबरे रिकॉर्ड तोर देतो और तो’कों हू
दो पैसा मिल जाते! आव देखै है न ताव, तोय तौ बस जीभ हिलायवे
सों मतलब है. अरे बावरी, अपुन महाराष्ट्र में रह रहे हैं, ऐसे में अपुन कों मराठी भाषा आनी चैंयें कि नाँय? मराठी सीख लैवे में
नुकसान ही का है? अपुन अमेरिका जामें तौ वहाँ के तौर तरीका
सीखें हैं कि नाँय? भलें ही बोल न पाते होंय मगर अमेरिकन एक्सेंट में बोलवे कौ
प्रयास करें हैं कि नाँय? जब महाराष्ट्र में रह रहे हैं,
मराठी त्यौहार गोविन्दा आला रे पै झूम रहे हैं, यहाँ के वडा
पाव के मजा लूट रहे हैं, यहाँ दौलत कमाय रहे हैं तौ यहाँ की
भाषा सीखवे में कहा परेसानी? क्यों परहेज करनों? बस ऐसौ सोच कें ही मैं’नें मराठी सीखवे कौ निर्णय लै लियौ. तू भी है न, जहाँ सूई हू न घुस पावै, वहाँ फावरौ घुसाती रहै.
अरे घुटरू हमेसा मोसों कहतो मगर अबकी बार तौ तू सेंटी
है गयौ. इतनों भड़कवे की का जरुरत है? कहूँ चोर की दाढ़ी में तिनका तौ नाँय नें? खैर,
मैं तोय एक मजेदार किस्सा सुनाओं! हमारे परौसी दुबे जी रिक्सा चलामें,
मराठी सीखवे गये, वहाँ विनकों सिखायौ गयौ कि अगर
किसी से कहना हो कि जल्दी करो जल्दी करो, तो मराठी में उसके लिए कहते हैं लवकर
लवकर. अब वे बिचारे सबेरें सबेरें डिब्बा लै कें दो नम्बर की लैन में लगे भये
हुते. अन्दर जो गयौ वौ निकरवे कौ नाम ही न लेय. अब दुबे जी कों कहनी तौ हुती जल्दी
जल्दी मगर कह बैठे लवकर लवकर. बस फिर कहा, अन्दर सों मिसराइन चिल्लाय कें बोली
तेरा सत्यानास हो दुबे के बच्चे, घर में माँ बहन नहीं हैं क्या
जो मुझसे कह रहा है लब कर लब कर! ठहर अभी बताती हूँ तेरी मेहरारू को. समझौ,
तू काहू सरमाइन, बरमाइन सों लबकर मत कह बैठियो!
नवीन सी चतुर्वेदी
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