सेंचुरी और आभार ज्ञापन – ब्रजभाषा व्यंग्य

लो साब देखते ही देखते सेंचुरी लग ही गयी। सेंचुरी मतबल हंड्रेड मतबल सैंकड़ा मतबल शतक। हम हू का बिना बात के कागद कारे करें जाय रहे हैं! कागद कारे या तौ एक जमाने में जनसत्ता वारे प्रभास जोसी जी करौ करते या भैया सरकारी लोग करौ करें हैं।

खैर अपुन कों का? सेंचुरी कोउ ऐसौ सब्द तौ है नाँय जाकों समझवे कि लिएं सब्दकोस की जरूरत परै। पहलें तौ सेंचुरी केवल किरकेट सों जोर कें ही देखी जाउ करती मगर अब तौ साब राजनीति वारे हू याकौ चोखौ प्रयोग करवे लगे हैं। परधान मंत्री जी के या फलाने मुख्यमंत्री जी के सौ दिन पूरे हुए। सौ दिन पूरे हैवे की घोषणा बिचारे ऐसी तसल्ली सों करें हैं जैसें काहू जमाने में वेस्ट इंडीज के फास्ट बॉलर’न के पहले पाँच सात ओवर खेलवे के बाद सुनील गावस्कर और कृष्णमाचारी श्रीकांत चैन की स्वांस लेउ करते। हाश जान बच गयी, अब खेलंगे। राजनीति की हालत ऐसी है हू तौ गयी है।  जरूरी नाँय कि दूसरी टीम कौ गेंदबाज ही आउट करै, कभूकभार तौ अपनी ही टीम कौ खिलाड़ी, मतलब  नॉन स्ट्राइकर हू या तौ रन आउट कराय देवै है या कभूकभार खुद ही रनआउट है कें मैच कौ गेम बजवाय देवै है। मगर भैया अपनी सेंचुरी न तौ किरकेट वारी सेंचुरी है और न ही राजनीति वारी। अपनी सेंचुरी तौ सामना अखबार में ब्रजभाषा व्यंग्य के सौवें प्रकाशन सों सम्बन्धित है। हाँ हाँ ना ना करते भए, गिरते परते भए, जैसें हू भए वैसें भैया ब्रजभासा व्यंग्य के सौ आर्टिकल पूरे है ही गये। खुद्द ब्रजमण्डल में ब्रजभासा गद्य कों छापौ नाँय जाय रह्यौ ऐसे में महाराष्ट्र में एक मराठी परिवार के प्रबन्धन में प्रकाशित अखबार के द्वारा ब्रजभासा की यह सेवा श्लाघनीय है। प्रशंसनीय है। काबिले-तारीफ है। तदर्थ आज हम समस्त ब्रजवासि’न की तरफ सों, साँचे हृदय सों, अखबार प्रबन्धन कौ, सम्पादन मण्डल कौ, या प्रकल्प सों प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप सों जुड़े भए प्रत्येक व्यक्ति कौ और लास्ट बट नॉट द लीस्ट पाठक माई बाप कौ कोटि कोटि आभार व्यक्त कर रहे हैं। थोरौ लिखौ है जादा समझियो और या कलम के मजदूर पै आप सब अपनी कृपा दृष्टि बनायें रखियो।

नवीन सी. चतुर्वेदी

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